इटाढ़ी रेलवे गुमटी खोलने की मांग को लेकर कांग्रेस का धरना, आरओबी बंद होने से लाखों लोगों की परेशानी बढ़ी
जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में शांतिपूर्ण प्रदर्शन, रेलवे प्रशासन को सौंपा ज्ञापन; आरओबी चालू होने तक गुमटी से आवागमन की अनुमति देने की मांग


न्यूज़ विज़न। बक्सर
इटाढ़ी रेलवे गुमटी को जनहित में तत्काल आवागमन के लिए खोले जाने की मांग को लेकर सोमवार को बक्सर जिला कांग्रेस कमेटी एवं क्षेत्र की आम जनता ने जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय की अध्यक्षता में रेलवे स्टेशन परिसर में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने रेलवे प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए जल्द से जल्द सकारात्मक कार्रवाई की मांग की।
धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बक्सर-इटाढ़ी मार्ग पर स्थित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के क्षतिग्रस्त होने से इटाढ़ी प्रखंड सहित आसपास के दर्जनों गांवों की लाखों आबादी का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है। इसका असर आम नागरिकों, विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों, व्यापारियों, महिलाओं और नौकरीपेशा लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरओबी के मरम्मत एवं पुनर्निर्माण कार्य में अभी दो से तीन महीने का समय लग सकता है। ऐसे में इटाढ़ी रेलवे गुमटी को बंद रखना लोगों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। आवागमन बाधित होने से लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों हो रहे हैं।
धरना में शामिल लोगों ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इटाढ़ी रेलवे गुमटी को तत्काल प्रभाव से आम जनता के लिए खोला जाए। साथ ही जब तक क्षतिग्रस्त रेलवे ओवरब्रिज पूरी तरह चालू नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में गुमटी से आवागमन की अनुमति दी जाए। आंदोलनकारियों ने विश्वास जताया कि रेलवे प्रशासन जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा और जल्द आवश्यक कदम उठाएगा, जिससे क्षेत्र की लाखों आबादी को राहत मिल सके।
धरना-प्रदर्शन में कांग्रेस नेता कामेश्वर पांडेय, उमाशंकर पांडेय, हरिशंकर त्रिवेदी, राजा रमण पांडेय, लालबाबू मिश्रा, बुचा उपाध्याय, निर्मला देवी, लक्ष्मण उपाध्याय, राजू रंजन वर्मा, साबिर हाशमी, गणेश पांडेय, शिवाकांत पांडेय, गुप्तेश्वर पांडेय, संजय पांडेय, प्रो. पी.के. मिश्रा सहित सैकड़ों कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





