खरवार समाज ने धूमधाम से मनाई वार्षिक खरवार बहारवार पूजा, जल-जंगल-जमीन की रक्षा का लिया संकल्प
पांडेयपट्टी में माँ वन देवी की पूजा-अर्चना कर समाज की एकजुटता और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश, सैकड़ों की संख्या में शामिल हुए खरवार समाज के लोग


न्यूज़ विज़न। बक्सर
राष्ट्रीय आदिवासी मोर्चा, बिहार के बक्सर जिला स्तरीय खरवार समाज के तत्वावधान में वार्षिक खरवार बहारवार (माँ वन देवी) पूजा का आयोजन पांडेयपट्टी स्थित माँ दुर्गा मंदिर के समीप बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ किया गया। पूजा-अर्चना में खरवार समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पारंपरिक विधि-विधान से माँ वन देवी की आराधना कर सुख-समृद्धि एवं समाज की उन्नति की कामना की।
इस अवसर पर समाज के लोगों ने विशेष रूप से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संकल्प लिया। पूजा के माध्यम से प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की कामना की गई। आयोजन के दौरान खरवार समाज की सामाजिक एकजुटता और आपसी भाईचारे का भी परिचय देखने को मिला। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि नगर परिषद बक्सर के उप सभापति प्रतिनिधि सुनील मिश्रा शामिल हुए। उन्होंने पूजा में शामिल होकर माँ वन देवी का आशीर्वाद लिया तथा समाज के लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
इस दौरान पांडेयपट्टी के पूर्व मुखिया भोला शंकर खरवार, प्रदेश अध्यक्ष सोनू खरवार, प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रजेश खरवार, मंतोष खरवार, राजन खरवार, विनोद खरवार, त्रिलोकी खरवार, ददन खरवार सहित खरवार समाज के कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। पूजा कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। लोगों ने पारंपरिक आस्था और संस्कृति के साथ माँ वन देवी की पूजा-अर्चना की। आयोजन में समाज के युवाओं और वरिष्ठ सदस्यों की भी सक्रिय भागीदारी रही।
आयोजकों ने कहा कि खरवार बहारवार पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और समाज के बीच गहरे संबंध को मजबूत करने का अवसर भी है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के बिना मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य संभव नहीं है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में समाज के लोगों ने आपसी एकता, सामाजिक उत्थान और प्रकृति संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। आयोजन शांतिपूर्ण एवं उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ।





