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घरों से निकलने वाले कचरे से बनेगा कंपोस्ट, खेतों में आएगी हरियाली

स्वच्छता पदाधिकारी ने कहा - किसानों को बाजार से सस्ते दर पर उपलब्ध कराया जाएगा जैविक खाद

न्यूज विजन। बक्सर
नगर परिषद ने शहर के कचरे को समस्या के बजाय संसाधन बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। जल्द ही बक्सर के घरों से निकलने वाले गीले कचरे से उच्च गुणवत्ता वाली बायो-कम्पोस्ट यानी जैविक खाद तैयार की जाएगी। नगर परिषद कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रति दिन कुल 42 वार्डों से औसतन 90 टन कचरा निकलता है। कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू होते ही कचरा का निस्तारण आसान हो जाएगा।

 

नगर परिषद के स्वच्छता पदाधिकारी रवि कुमार सिंह ने बताया कि बाइपास रोड स्थित कचरा प्रबंधन पीट में घरों से निकलने वाले कचरा से नगर परिषद कम्पोस्ट बनाएगी। इसकी तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि बाइपास रोड के पास बने कचरा प्रबंधन पीट पर बायो कम्पोस्टिंग मशीन स्थापित किया गया है। इस मशीन से चौबीस घंटे में शहर से निकलने वाले गीले कचरे से खाद बनाया जा सकेगा। बताया कि इन मशीनों के द्वारा प्रतिदिन दस टन गीला कचरा से डायरेक्ट कम्पोस्ट तैयार किया जाएगा। उन्होंने कचरा प्रबंधन पीट को जल्द से जल्द चालू करने के लिए टेंडर निकाले जाने की बात कही।

 

स्वच्छता पदाधिकारी रवि सिंह ने बताया कि खाद की गुणवत्ता की जांच कराने और ब्रांडिंग करने के बाद किसानों को ट्रॉयल के लिए दिया जाएगा। बाजार में मिलने वाले जैविक खाद से काफी सस्ते दर पर किसानों को कम्पोस्ट उपलब्ध कराया जाएगा। इससे रासायनिक खाद का उपयोग कम होगा। जैविक खाद के उपयोग से जहां मिट्टी कमी उर्वरा शक्ति बढ़ेगी वहीं मानव जीवन पर रासायनिक खाद के उपयोग से होने वाले दुष्प्रभाव कम होंगे। साथ ही नगर परिषद को अलग से राजस्व की प्राप्ति होगा। कहा कि शहरवासियों को सूखा और गिला कचरा अलग-अलग एकत्रित करने के लिए जागरुक किया जाएगा।

 

शहर के चौक चौराहों पर एकत्रित किए जा रहे कूड़ा कचरा से निकलने वाले दुर्गंध से शहरवासियों को जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। सड़क के आस पास जमा होने वाला कचरा को सीधे मशीन में डालकर कम्पोस्ट बनाया जाएगा। नगर परिषद के इस पहल से शहरवासियों को सड़क पर पसरे कचरे से होने वाली परेशानी से निजात मिल जाएगी। स्वच्छता पदाधिकारी रवि सिंह ने बताया कि रसोई घरों से निकलने वाला गिला कचरा जैसे चायपत्ति, सब्जियों का अवशेष, फलों के छिलके, बचा हुआ खाना आदि को डंप करने के बजाय उसे मशीन में डाल कर जैविक खाद बनाया जाएगा।

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