राजा परीक्षित को मिला श्रीशुकदेव जी से भागवत ज्ञान, भक्ति और आत्मचिंतन का दिया संदेश
बनारपुर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, आचार्य रणधीर ओझा ने जीवन की क्षणभंगुरता और ईश्वर भक्ति का कराया बोध

न्यूज़ विज़न। बक्सर/चौसा
चौसा प्रखंड के बनारपुर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस सोमवार को कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। धार्मिक वातावरण के बीच कथा व्यास आचार्य रणधीर ओझा जी ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण एवं आध्यात्मिक वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य का संदेश दिया।
द्वितीय दिवस की कथा में राजा परीक्षित के जीवन प्रसंग और श्रीशुकदेव जी के आगमन का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि जब राजा परीक्षित को अपने जीवन के सीमित समय का बोध हुआ, तब उन्होंने सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर अपने शेष जीवन को भगवान की कथा सुनने और परम सत्य को जानने में लगाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में परम ज्ञानी श्रीशुकदेव जी का आगमन होता है और राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत का दिव्य ज्ञान प्राप्त होता है।आचार्य रणधीर ओझा जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य को जीवन की क्षणभंगुरता का बोध कराती है। संसार में प्राप्त भौतिक सुख-सुविधाएं और उपलब्धियां स्थायी नहीं हैं। ऐसे में मनुष्य को अपने जीवन में ईश्वर का स्मरण, सत्संग, सदाचार और भक्ति को विशेष स्थान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस मनुष्य का मन भगवान की कथा में रम जाता है, उसके भीतर से भय, मोह और अहंकार धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं और उसे आत्मिक शांति की अनुभूति होने लगती है।
कथा व्यास ने राजा परीक्षित के प्रसंग के माध्यम से आत्मचिंतन का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन में अपनी भूलों का बोध होने पर अहंकार में रहने के बजाय आत्ममंथन करते हुए ईश्वर की शरण ग्रहण करनी चाहिए। श्रीशुकदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को भागवत ज्ञान प्रदान किया जाना इस बात का प्रतीक है कि सच्चे गुरु और सत्संग के माध्यम से मनुष्य को जीवन के परम सत्य का मार्ग प्राप्त हो सकता है। कथा के विभिन्न प्रसंगों के दौरान श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और भक्ति गीतों से कथा स्थल का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कथा का श्रवण किया और भगवान की भक्ति में लीन दिखाई दिए।
आचार्य रणधीर ओझा जी ने श्रद्धालुओं को यह भी संदेश दिया कि भागवत कथा का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि उसके संदेश को अपने जीवन और आचरण में उतारना है। परिवार में प्रेम, समाज में सद्भाव, जरूरतमंदों की सेवा और भगवान के प्रति समर्पण ही भक्ति के वास्तविक स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने आचरण में धर्म और सदाचार को स्थान देता है, तभी कथा श्रवण का वास्तविक लाभ प्राप्त होता है।
इस अवसर पर मुख्य आयोजक राधेश्याम तिवारी एवं मुख्य संयोजक आलोक तिवारी ने श्रद्धालुओं से परिवार सहित कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने और इस आध्यात्मिक आयोजन का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल सात दिनों तक चलने वाला धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, संस्कार, सद्भाव और भक्ति से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है।
बानपुर में चल रहे इस सात दिवसीय आयोजन को लेकर ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। कथा के आगामी दिनों में भी श्रीमद्भागवत के विभिन्न आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा।




