इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग रेल चक्का जाम मामले में समन पर RPF पोस्ट पहुंचे नामजद आंदोलनकारी, अधिवक्ताओं की मौजूदगी में हुई सकारात्मक बातचीत
रेल चक्का जाम मामले में 33 नामजद और 150 अज्ञात पर दर्ज है प्राथमिकी, आंदोलनकारियों ने कहा—जनहित में उठाई थी आवाज, मुकदमा वापस लेने पर हो विचार


न्यूज़ विज़न। बक्सर
इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग को दोबारा खोलने की मांग को लेकर बीते 7 अगस्त को हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर किए गए रेल चक्का जाम के मामले में मंगलवार को नामजद आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक-राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोग आरपीएफ पोस्ट पहुंचे। आरपीएफ की ओर से भेजे गए समन के आधार पर पहुंचे आंदोलनकारियों के साथ बक्सर सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं ने भी मामले को लेकर अधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई और मामले के कानूनी एवं प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
33 नामजद और 150 अज्ञात लोगों पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी
गौरतलब है कि इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग खोलने की मांग को लेकर 7 अगस्त को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आंदोलनकारियों ने हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर करीब 25 मिनट तक रेल चक्का जाम किया था। रेल मार्ग बाधित होने के कारण मगध एक्सप्रेस समेत तीन ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ था। इस मामले में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा 33 नामजद और करीब 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आरपीएफ ने नामजद लोगों को समन भेजकर पोस्ट पर उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
अधिवक्ताओं के साथ RPF पोस्ट पहुंचे आंदोलनकारी
मंगलवार को समन के आधार पर बक्सर सिविल कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल आनंद, अधिवक्ता संघ के सचिव बिंदेश्वरी पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय, कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय, अतिपिछड़ा संघर्ष मोर्चा के संयोजक सरोज राजभर, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरिशंकर उर्फ गोपाल त्रिवेदी, कांग्रेस नेता लक्ष्मण उपाध्याय समेत कई आंदोलनकारी एवं सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता आरपीएफ पोस्ट पहुंचे। आरपीएफ निरीक्षक कुंदन सिंह की मौजूदगी में अधिकारियों, अधिवक्ताओं और आंदोलनकारियों के बीच पूरे मामले को लेकर बातचीत हुई। इस दौरान सभी पक्षों ने अपनी-अपनी बातें रखीं। बातचीत का माहौल सकारात्मक रहा और मामले से जुड़े विभिन्न कानूनी एवं प्रशासनिक पहलुओं पर चर्चा की गई।
‘जनहित से जुड़ा था आंदोलन, मुकदमा वापस लेने पर हो विचार’
दलित अति पिछड़ा संघर्ष मोर्चा के सरोज राजभर ने कहा कि इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग को खोलने की मांग क्षेत्र की जनता की सुविधा और व्यापक जनहित से जुड़ी हुई है। आंदोलनकारियों ने इसी जनसमस्या को लेकर अपनी आवाज बुलंद की थी। उन्होंने कहा कि अब जब इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग को दोबारा खोलने की दिशा में विभागीय स्तर पर कवायद शुरू हो चुकी है, तो आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लेने पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन और रेलवे सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए मामले का समाधान निकालेगा।
RPF ने कहा—नियमानुसार पूरी की जा रही कानूनी प्रक्रिया
वहीं, आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार समन जारी किए जाने के बाद जो भी नामजद अभियुक्त आरपीएफ पोस्ट पर उपस्थित हो रहे हैं, उनके संबंध में नियमानुसार आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उपस्थित लोगों से नियमानुसार बंधपत्र भरवाने की प्रक्रिया भी की जा रही है। आरपीएफ की ओर से स्पष्ट किया गया कि मामले में आगे की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही की जाएगी।
रेल चक्का जाम से प्रभावित हुआ था ट्रेनों का परिचालन
बता दें कि 7 अगस्त को इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग खोलने की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग को करीब 25 मिनट तक बाधित किया था। रेल ट्रैक पर प्रदर्शन के कारण मगध एक्सप्रेस समेत तीन ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ था। इसके बाद आरपीएफ ने कार्रवाई करते हुए 33 नामजद एवं 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
सकारात्मक बातचीत के बाद समाधान की उम्मीद
मंगलवार को आरपीएफ पोस्ट पर हुई बातचीत के बाद आंदोलनकारियों ने उम्मीद जताई कि इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग को दोबारा खोलने की प्रक्रिया में अब तेजी आएगी। साथ ही रेल चक्का जाम मामले में भी आगे कोई सकारात्मक समाधान निकल सकता है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग लंबे समय से स्थानीय लोगों के आवागमन और क्षेत्रीय संपर्क का महत्वपूर्ण माध्यम रही है। इसके बंद होने से आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में क्रॉसिंग को खोलने की दिशा में हो रही पहल को स्थानीय लोगों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि रेलवे क्रॉसिंग खोलने की प्रक्रिया के साथ-साथ आंदोलनकारियों पर दर्ज रेल चक्का जाम मामले में प्रशासन और रेलवे की ओर से आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
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