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बक्सर राजस्व विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल ; 28 डिसमिल जमीन बिहार से हुआ गायब, नहीं पंहुचा उत्तर प्रदेश ? 

बक्सर सीओ ने जमीन को बताया उत्तर प्रदेश में, यूपी के अधिकारियों की जांच में निकली बिहार में; खतियान में अब भी दर्ज है पूरी 60 डिसमिल जमीन, रैयत ने उच्च अधिकारियों से लगाई गुहार

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बिहार सरकार के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और स्थानीय अधिकारियों की मनमानी को लेकर बक्सर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रैयत तारकेश्वर मिश्रा का आरोप है कि उनकी 28 डिसमिल जमीन को बक्सर अंचल के अंचल अधिकारी (सीओ) द्वारा उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में चले जाने की बात कहकर राजस्व रिकॉर्ड से गायब कर दिया गया, जबकि उत्तर प्रदेश प्रशासन की जांच में उक्त भूमि के उत्तर प्रदेश में होने की पुष्टि नहीं हुई है। मामला बक्सर अंचल के मौजा मुंगरौल, थाना नंबर 384, खाता संख्या 35, खेसरा संख्या 7 से जुड़ा है। रैयत के अनुसार उक्त भूमि का कुल रकबा 60 डिसमिल है, जिसमें से 28 डिसमिल जमीन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है।

 

यूपी में होने का दावा, लेकिन जांच में नहीं मिला कोई प्रमाण

रैयत तारकेश्वर मिश्रा के मुताबिक बक्सर अंचल कार्यालय की ओर से उन्हें बताया गया कि 28 डिसमिल भूमि उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में चली गई है। इसके बाद उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।शिकायत के बाद संबंधित उप जिलाधिकारी के निर्देश पर तहसीलदार से मामले की जांच कराई गई। जांच के बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन की ओर से बताया गया कि संबंधित भूमि उत्तर प्रदेश में नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जमीन बिहार में नहीं है और उत्तर प्रदेश में भी नहीं है, तो आखिर 28 डिसमिल जमीन गई कहां?

 

हालिया सर्वे में बिहार के खतियान में दर्ज है 60 डिसमिल

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि हाल में हुए सर्वे के रिकॉर्ड में बिहार में उक्त जमीन का कुल 60 डिसमिल रकबा खतियान में दर्ज बताया जा रहा है। ऐसे में एक ही जमीन को लेकर अलग-अलग स्तर पर सामने आ रही सूचनाओं ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रैयत का सवाल है कि जब बिहार के रिकॉर्ड में जमीन मौजूद है और उत्तर प्रदेश प्रशासन भी इसे अपनी सीमा में नहीं मान रहा, तो फिर बक्सर अंचल कार्यालय की ओर से 28 डिसमिल जमीन को उत्तर प्रदेश में बताए जाने का आधार क्या था?

अपर समाहर्ता लोक शिकायत ने दिया कार्रवाई का निर्देश

मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुका है। बक्सर अपर समाहर्ता लोक शिकायत शशिकांत पासवान की ओर से लोक प्राधिकार सह अंचल अधिकारी को मामले में कृत कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। निर्देश के आलोक में 27 अगस्त को अंचल अमीन द्वारा जमीन की मापी किए जाने की तिथि निर्धारित की गई थी। अब मापी और राजस्व अभिलेखों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित 28 डिसमिल भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और रिकॉर्ड में विसंगति कहां से उत्पन्न हुई।

मामला पटना प्रमंडलीय आयुक्त के यहां भी पहुंचा

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रैयत ने न्याय और समाधान के लिए पटना प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष भी मामला दर्ज कराया है, जहां सुनवाई जारी है। एक सामान्य रैयत को अपनी जमीन के अस्तित्व और रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट कराने के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और आम लोगों को मिलने वाली प्रशासनिक सुविधा पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सरकार के सख्त आदेशों के बावजूद अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल

बिहार सरकार लगातार अधिकारियों को जनता की शिकायतों का समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से समाधान करने का निर्देश देती रही है। सरकार की ओर से लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की बात भी कही जाती है। लेकिन बक्सर का यह मामला सवाल खड़ा करता है कि जमीन जैसे संवेदनशील विषय में यदि एक अधिकारी द्वारा भूमि को दूसरे राज्य में बताए जाने की बात सामने आती है और दूसरे राज्य की जांच में भूमि वहां नहीं मिलती, तो जवाबदेही किसकी होगी? राजस्व रिकॉर्ड में जमीन की स्थिति को लेकर पैदा हुई इस कथित विसंगति ने रैयत के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। जमीन संबंधी मामलों में रिकॉर्ड की छोटी-सी गलती भी वर्षों तक मुकदमेबाजी और विवाद का कारण बन सकती है।

अब सबसे बड़ा सवाल—28 डिसमिल जमीन आखिर कहां है?

इस पूरे मामले में अब कई सवाल प्रशासन के सामने हैं—

– 28 डिसमिल जमीन को उत्तर प्रदेश में बताए जाने का आधार क्या था?
– क्या बक्सर अंचल कार्यालय के पास इस दावे से संबंधित कोई दस्तावेज या राजस्व अभिलेख है?
– यदि भूमि उत्तर प्रदेश में नहीं है तो बिहार के रिकॉर्ड में उसकी स्थिति क्या है?
– हालिया सर्वे में पूरी 60 डिसमिल जमीन दर्ज होने के बावजूद 28 डिसमिल को लेकर विवाद क्यों उत्पन्न हुआ?
– इस कथित विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी कौन हैं?
– रैयत को अपनी ही जमीन की स्थिति स्पष्ट कराने के लिए लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं?

इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल रैयत की शिकायत, उत्तर प्रदेश में हुई जांच और बिहार के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रकबे के बीच दिखाई दे रहा विरोधाभास राजस्व विभाग के लिए गंभीर जांच का विषय है।

न्यूज़ विजन की नजर: यह मामला केवल एक रैयत की जमीन का विवाद नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड की शुद्धता, अधिकारियों की जवाबदेही और आम नागरिकों को मिलने वाले न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या गलत रिपोर्टिंग सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी अन्य रैयत को अपनी जमीन के अस्तित्व को साबित करने के लिए दर-दर भटकना न पड़े।

नोट: उपरोक्त समाचार में लगाए गए आरोप संबंधित रैयत द्वारा बताए गए तथ्यों और उपलब्ध शिकायत/जांच संबंधी विवरण पर आधारित हैं। अंतिम तथ्यात्मक स्थिति संबंधित प्रशासनिक जांच और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

 

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