ईद-ए-मिलाद पर रक्तदान शिविर में अव्यवस्था का आरोप, ” ब्लड” बक्सर के शिविर में 50 से अधिक रक्तदाता पहुंचे
सिविल सर्जन को 21 जुलाई को दिया गया था आवेदन, शिविर में चिकित्सक के नहीं पहुंचने पर उठे सवाल; रेडक्रॉस अध्यक्ष बोले—एक ही दिन दो जगह शिविर से बढ़ी व्यवस्था की चुनौती


न्यूज़ विज़न। बक्सर
ईद-ए-मिलाद के अवसर पर बुधवार को शहर में दो अलग-अलग स्थानों पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। पहला शिविर दरिया शहीद बाबा मजार परिसर में, जबकि दूसरा किला मैदान के गेट के समीप आयोजित हुआ। दोनों शिविरों के आयोजन को लेकर स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। किला मैदान के समीप नियमित रक्तदाता एवं ब्यूटीफुल लाइफ ऑनलाइन ऑन डोनेटिंग “ब्लड” संस्था के संस्थापक प्रियेश द्वारा आयोजित शिविर में 50 से अधिक रक्तदाता पहुंचे, लेकिन पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों एवं चिकित्सक की मौजूदगी नहीं होने से अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने का आरोप लगाया गया।
प्रियेश के अनुसार, उनके द्वारा रक्तदान शिविर आयोजित करने के संबंध में 21 जुलाई को ही सिविल सर्जन के समक्ष आवेदन समर्पित किया गया था। इसके बावजूद शिविर के दौरान सिविल सर्जन की ओर से महज एक टेक्नीशियन और एक काउंसलर को भेजा गया। शिविर में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। जबकि उनके मुताबिक सिविल सर्जन द्वारा प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी एवं रेडक्रॉस को भी आवश्यक व्यवस्था के लिए निर्देशित किया गया था।
50 से अधिक रक्तदाता पहुंचे, कई बिना रक्तदान लौटे
आयोजक प्रियेश ने बताया कि शिविर में रक्तदान करने के लिए 50 से अधिक लोग पहुंचे थे। बड़ी संख्या में रक्तदाताओं के पहुंचने के बावजूद पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुव्यवस्था को देखते हुए कई रक्तदाता बिना रक्तदान किए ही वापस लौट गए। प्रियेश ने यह भी आरोप लगाया कि व्यवस्था की कमी के कारण कुछ रक्तदाताओं की तबीयत बिगड़ने जैसी स्थिति उत्पन्न होने लगी थी। उनका कहना है कि रक्तदान जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य के लिए पहले से स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी गई थी, इसलिए पर्याप्त चिकित्सकीय व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी।
रेडक्रॉस अध्यक्ष ने भी चिकित्सक की मौजूदगी को बताया जरूरी
इस मामले में रेडक्रॉस अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने कहा कि सदर अस्पताल में पहले से ही संसाधनों की कमी है। ऐसे में एक ही दिन दो अलग-अलग स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित करना उचित नहीं था। हालांकि, जब दोनों जगह शिविर का आयोजन किया गया तो बेहतर समन्वय और व्यवस्था की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि रक्तदान शिविर में चिकित्सक की मौजूदगी जरूरी होती है। सुरेश अग्रवाल ने यह भी कहा कि प्रियेश जिले के नियमित रक्तदाता हैं और सिविल सर्जन को उनकी भूमिका एवं नियमित रक्तदान गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी।
दोनों शिविरों के लिए अलग-अलग तारीखों में जारी हुए थे पत्र
मिली जानकारी के अनुसार, किला मैदान के समीप प्रियेश द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर के लिए सदर अस्पताल की ओर से 11 अगस्त को पत्र जारी किया गया था, जबकि दरिया शहीद बाबा मजार परिसर में आयोजित रक्तदान शिविर के लिए 24 अगस्त को पत्र जारी किया गया। ऐसे में एक ही दिन दो स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित होने और सीमित स्वास्थ्य संसाधनों के बीच दोनों जगह व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रक्तदान शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी को देखते हुए आयोजकों और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
रक्तदान जैसे मानवीय कार्य में व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
रक्तदान को जीवन बचाने वाला महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य माना जाता है। ऐसे शिविरों में रक्तदाताओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आवश्यक होता है। ईद-ए-मिलाद के अवसर पर आयोजित इन शिविरों में लोगों की अच्छी भागीदारी के बावजूद व्यवस्थागत कमी के आरोप सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। अब देखना होगा कि भविष्य में शहर में आयोजित होने वाले रक्तदान शिविरों के लिए स्वास्थ्य विभाग, रेडक्रॉस एवं आयोजकों के बीच किस प्रकार बेहतर समन्वय स्थापित किया जाता है, ताकि रक्तदाताओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और अधिक से अधिक लोग सुरक्षित तरीके से रक्तदान कर सकें।
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