आजादी के 80 साल बाद भी डुभा गांव में सड़क का इंतजार, ग्रामीणों का दर्द नहीं हुआ खत्म
मुख्यमंत्री के जनता दरबार से लेकर हाईकोर्ट तक लगाई गुहार, जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से ग्रामीणों में आक्रोश; बरसात में गांव तक पहुंचना हो जाता है मुश्किल


न्यूज़ विज़न। बक्सर/सिमरी
आजादी के 80 वर्ष बाद भी बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड अंतर्गत डुभा गांव के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि देश और राज्य विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, लेकिन डुभा गांव आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन से लेकर इलाज और आपातकालीन स्थिति तक में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। गांव में दोपहिया और चारपहिया वाहनों का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। ग्रामीणों का दावा है कि समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण कई लोगों की जान तक जा चुकी है।
25 वर्षों के शासन के बावजूद सड़क से वंचित गांव
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब 25 वर्षों में बिहार के अधिकांश गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने की दिशा में काम हुआ है, लेकिन डुभा गांव अब भी इस बुनियादी सुविधा से महरूम है। ग्रामीण इसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि लगातार मांग और शिकायत के बावजूद गांव की सड़क समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
जनता दरबार से हाईकोर्ट तक लगाई गुहार
गांव के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर विजय कांत ठाकुर ने बताया कि डुभा गांव में आजादी के बाद से ही सड़क की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार तक अपनी बात पहुंचाई। इसके अलावा ग्रामीणों ने पटना हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया और मामले में न्यायालय का फैसला भी प्राप्त किया। स्थानीय स्तर पर जिलाधिकारी और अंचलाधिकारी को भी कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन इसके बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में निराशा है। विजय कांत ठाकुर के अनुसार, ग्रामीणों ने अपनी समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष बार-बार गुहार लगाई, लेकिन हर स्तर पर प्रयास करने के बावजूद उन्हें अब तक ठोस समाधान नहीं मिला है।
चुनाव बहिष्कार के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
ग्रामीणों का आक्रोश उस समय और बढ़ गया जब तमाम प्रयासों के बाद भी सड़क का निर्माण नहीं हुआ। विजय कांत ठाकुर ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पूर्ण रूप से मतदान का बहिष्कार करने का निर्णय लिया था। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों के प्रति विरोध जताते हुए चुनाव से दूरी बनाई और अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बावजूद गांव की सड़क समस्या का समाधान नहीं होने से ग्रामीण खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
बरसात में बढ़ जाती है परेशानी
डुभा गांव के ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ जाती हैं। रास्ते की खराब स्थिति के कारण बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। आपात स्थिति में वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाने के कारण मरीजों को मुख्य सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने सरकार से लगाई स्थायी समाधान की गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि सिर्फ आवागमन के लिए एक पक्की और सुगम सड़क चाहते हैं। उनका कहना है कि सड़क बनने से गांव के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। अब ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन और सरकार से डुभा गांव की सड़क समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से आश्वासन और आवेदन के बावजूद यदि सड़क नहीं बनती है तो यह उनके लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द सड़क निर्माण की पहल करेगा, ताकि आजादी के आठ दशक बाद भी विकास से वंचित डुभा गांव को बुनियादी आवागमन की सुविधा मिल सके।





