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मृदा स्वास्थ्य से बेहतर पैदावार तक: कृषि विज्ञान केन्द्र बक्सर में 15 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

40 प्रशिक्षणार्थियों को 32 सैद्धांतिक और 12 व्यवहारिक कक्षाओं में मिलेगा प्रशिक्षण, कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों से सीखेंगे आधुनिक पोषक तत्व प्रबंधन की तकनीक

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भा.कृ.अनु.प.) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केन्द्र, बक्सर द्वारा “समेकित पोषक तत्व प्रबंधन” विषय पर 15 दिवसीय सर्टिफिकेट कोर्स का सोमवार को विधिवत शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम 17 अगस्त से 03 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें कुल 40 प्रशिक्षणार्थी भाग ले रहे हैं।

 

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को 32 सैद्धांतिक एवं 12 व्यवहारिक कक्षाओं के माध्यम से समेकित पोषक तत्व प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की विभिन्न संस्थाओं के वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक तथा कृषि विज्ञान केन्द्रों के विशेषज्ञ प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण के प्रथम दिन आमंत्रित भा.कृ.अनु.प. पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के विभागाध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजीव कुमार ने “पौधों के लिए जरूरी मुख्य पोषक तत्व एवं पौधों की बढ़त तथा पैदावार में उनकी भूमिका” विषय पर सैद्धांतिक कक्षा ली। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों तथा फसल उत्पादन में उनकी उपयोगिता के संबंध में महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी दी। वहीं, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी ने “प्राकृतिक खेती में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन” विषय पर प्रशिक्षणार्थियों को विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और मृदा की टिकाऊ क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

 

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ प्रशिक्षण का शुभारंभ

कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार, विशिष्ट अतिथि धर्मेन्द्र कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी, बक्सर, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी तथा कृषि विज्ञान केन्द्र, बक्सर के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. देवकरन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन किया गया। अतिथियों एवं प्रशिक्षणार्थियों का स्वागत करते हुए डॉ. देवकरन ने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र, बक्सर द्वारा इस वर्ष समेकित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर द्वितीय बैच के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी जानकारी को कृषि क्षेत्र में प्रभावी रूप से उपयोग करने की अपील की।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरक प्रयोग की सलाह

मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार ने मृदा स्वास्थ्य को कृषि उत्पादन का आधार बताते हुए किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर अनुशंसित उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने संतुलित एवं वैज्ञानिक तरीके से पोषक तत्वों के उपयोग पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि जिला कृषि पदाधिकारी धर्मेन्द्र कुमार ने उर्वरक नियंत्रण नियमावली के अनुरूप उर्वरकों के रखरखाव एवं बिक्री के साथ-साथ संतुलित उर्वरक प्रयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को उर्वरक प्रबंधन से संबंधित नियमों एवं व्यवहारिक पहलुओं की जानकारी दी। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि टिकाऊ कृषि के लिए मृदा, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

विशेषज्ञों ने बताया प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम

प्रशिक्षण के विशेषज्ञ एवं पाठ्यक्रम सह-समन्वयक हरिगोबिन्द एवं डॉ. रामकेवल ने प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पोषक तत्वों की पहचान, मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, प्राकृतिक खेती तथा फसल उत्पादन में पोषक तत्वों की भूमिका सहित विभिन्न विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम में हेमलता कुमारी, बबिता कुमारी, कनकलता सिन्हा, दिवाकर कुमार सिंह, सिकंदर पाल, राजीव कुमार, अंकित कुमार समेत कुल 40 प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन में कृषि विज्ञान केन्द्र के श्री आरीफ प्रवेज, रवि चटर्जी एवं सरफराज अहमद खान ने सहयोग किया। यह प्रशिक्षण किसानों एवं कृषि से जुड़े प्रतिभागियों को वैज्ञानिक तरीके से पोषक तत्वों के प्रबंधन की जानकारी देने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

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