POLITICS

NALSAR के 2026 बैच के Enrolment पर विवाद, AAP ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से मांगा इस्तीफा

रमेश वर्मा का आरोप—बार काउंसिल ऑफ इंडिया वकीलों की स्वतंत्र वैधानिक संस्था, किसी राजनीतिक दल का प्रकोष्ठ नहीं

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा पर NALSAR के पूरे 2026 बैच के enrolment को रोकने संबंधी आदेश जारी करने का आरोप लगाते हुए आम आदमी पार्टी ने तीखा विरोध जताया है। शुक्रवार को AAP के बक्सर जिलाध्यक्ष रमेश वर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस पूरे मामले को लोकतांत्रिक और संस्थागत स्वतंत्रता से जोड़ते हुए मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की। रमेश वर्मा ने आरोप लगाया कि BCI वकीलों की एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है और इसे किसी राजनीतिक दल के प्रभाव या दबाव में काम नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी शैक्षणिक संस्थान के पूरे बैच के enrolment पर रोक लगाने जैसा आदेश जारी किया जाता है, तो ऐसे निर्णयों में पारदर्शिता, वैधानिक प्रक्रिया और संबंधित पक्षों के अधिकारों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।

 

विरोध के बाद आदेश वापस लेने का दावा
AAP जिलाध्यक्ष ने अपने बयान में दावा किया कि NALSAR के पूरे 2026 बैच के enrolment को रोकने संबंधी आदेश के खिलाफ देशभर में अधिवक्ताओं और जागरूक नागरिकों की ओर से विरोध सामने आया। उनके अनुसार, व्यापक विरोध के बाद संबंधित आदेश को वापस लेना पड़ा। उन्होंने इसे संस्थागत निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल बताते हुए कहा कि किसी भी वैधानिक संस्था में ऐसे फैसले नहीं होने चाहिए, जिनसे छात्रों और युवा अधिवक्ताओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो।

 

‘BCI, BJP का प्रकोष्ठ नहीं’
रमेश वर्मा ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया वकीलों की स्वतंत्र वैधानिक संस्था है, BJP का प्रकोष्ठ नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक और वैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है और इन संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रहकर काम करना चाहिए। उन्होंने मनन कुमार मिश्रा से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग करते हुए कहा कि संस्थागत निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना AAP नेता ने अपने बयान में केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हाल के वर्षों में असहमति को दबाने, संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करने और मनमाने आदेश थोपने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता की ताकत का इस्तेमाल संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। रमेश वर्मा ने कहा कि देश की जनता लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और जवाबदेही को लेकर लगातार सजग है। उन्होंने कहा कि जनता न तो सत्ता का अहंकार स्वीकार करेगी और न ही लोकतांत्रिक एवं वैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक हथियार बनने देगी।

संस्थाओं की स्वायत्तता पर बहस तेज
NALSAR enrolment विवाद को लेकर AAP के इस बयान के बाद BCI की कार्यप्रणाली, उसके निर्णयों की वैधानिकता और संस्थागत स्वायत्तता को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, इस मामले में BCI अथवा मनन कुमार मिश्रा की ओर से जारी आधिकारिक पक्ष को भी सामने रखा जाना महत्वपूर्ण होगा, ताकि पूरे विवाद की तस्वीर स्पष्ट हो सके। न्यूज़ विजन के लिए: यह मामला केवल enrolment से जुड़े एक निर्णय तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा बड़ा सवाल यह है कि देश की वैधानिक संस्थाएं किस प्रकार स्वतंत्र, पारदर्शी और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर काम करें। इसी मुद्दे को लेकर AAP ने BCI चेयरमैन के इस्तीफे की मांग उठाई है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button