बिहार में 2,996 सरकारी स्कूल बिना भवन के! AAP ने सरकार से पूछा- आखिर कब मिलेगा बच्चों को अपना स्कूल?
UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों पर रंजीत कुमार ने उठाए सवाल, कहा- स्कूल भवन कोई विलासिता नहीं, बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक जरूरत


न्यूज़ विज़न। बक्सर
मानसून सत्र के दौरान बिहार विधानसभा के समक्ष रखे गए UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार बिहार के 35 जिलों में 2,276 प्राथमिक, मध्य एवं माध्यमिक विद्यालय बिना अपने भवन के संचालित हो रहे हैं। वहीं, 720 उच्च माध्यमिक विद्यालय भी अपने भवन के बिना चल रहे हैं। इस तरह राज्य में कुल 2,996 विद्यालय ऐसे हैं, जिनके पास अपना भवन नहीं है।
इन आंकड़ों को लेकर आम आदमी पार्टी, बक्सर के रंजीत कुमार ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह केवल स्कूल भवनों की कमी का मामला नहीं है, बल्कि बिहार के लाखों बच्चों के भविष्य, शिक्षा के अधिकार और सरकार की प्राथमिकताओं से जुड़ा गंभीर सवाल है।
‘घोषणाओं से नहीं, जमीनी सुविधाओं से सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था’
रंजीत कुमार ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर विद्यालयों की बात करती है। लेकिन जब हजारों सरकारी स्कूल आज भी अपने भवन के बिना संचालित हो रहे हैं, तो इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि बच्चों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद तभी की जा सकती है, जब उन्हें पढ़ाई के लिए सुरक्षित, स्थायी और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए। अपना स्कूल भवन नहीं होने की स्थिति में बच्चों को किन परिस्थितियों में पढ़ना पड़ रहा है, इसकी भी गंभीरता से समीक्षा किए जाने की जरूरत है।
सरकार से रंजीत कुमार ने पूछे कई सवाल
रंजीत कुमार ने बिहार सरकार से सवाल किया कि राज्य के 2,996 विद्यालयों के पास आज तक अपना भवन क्यों नहीं है? इन विद्यालयों के भवन निर्माण के लिए सरकार ने अब तक क्या ठोस कार्ययोजना तैयार की है और इसे कब तक पूरा किया जाएगा? उन्होंने सरकार से यह भी जानना चाहा कि प्रत्येक विद्यालय के भवन निर्माण के लिए बजट और समय-सीमा सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि बिना भवन वाले कितने विद्यालय किराए के भवन, सामुदायिक भवन या अन्य अस्थायी व्यवस्थाओं में संचालित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार जिला-वार सूची सार्वजनिक करे, जिसमें यह स्पष्ट हो कि किस जिले में कितने विद्यालय बिना भवन के संचालित हो रहे हैं और प्रत्येक विद्यालय का भवन निर्माण कब तक पूरा किया जाएगा।
‘सरकारी स्कूलों के बच्चे भी समान अधिकार के हकदार’
रंजीत कुमार ने कहा कि बिहार के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे किसी भी तरह से निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों से कम अधिकार नहीं रखते। उन्होंने कहा कि स्कूल की इमारत कोई विलासिता नहीं, बल्कि बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिहार के बच्चों को केवल किताबें, योजनाएं और घोषणाएं नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें सुरक्षित कक्षाएं, शौचालय, बिजली, स्वच्छ पेयजल, खेल का मैदान और पढ़ाई के लिए स्थायी विद्यालय भवन भी चाहिए।
‘शिक्षा पर खर्च बिहार के भविष्य में निवेश’
AAP नेता ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि बिना भवन संचालित हो रहे 2,996 विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को उनका अपना स्कूल भवन आखिर कब मिलेगा। उन्होंने बिहार सरकार से मांग की कि बिना भवन संचालित सभी विद्यालयों की जिला-वार सूची सार्वजनिक की जाए, प्रत्येक विद्यालय के भवन निर्माण के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया जाए और निर्माण कार्य को निश्चित समय-सीमा के भीतर पूरा कराया जाए। रंजीत कुमार ने कहा कि शिक्षा पर होने वाला खर्च महज सरकारी बजट का एक मद नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य में किया जाने वाला निवेश है। यदि सरकार वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विकसित बिहार की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है, तो सबसे पहले सरकारी विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि हजारों विद्यालयों का बिना अपने भवन के संचालित होना सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए और इस दिशा में अब घोषणाओं के बजाय ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।





