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धान-गेहूं से आगे बढ़ रहे किसान! अब मशरूम बनेगा गांव की महिलाओं की कमाई का नया हथियार

बिना खेत और कम लागत में हजारों की आय का रास्ता, कुल्हड़िया के एफपीओ में जुटे सैकड़ों किसान, वैज्ञानिक बोले- आधी आबादी लिख रही आत्मनिर्भरता की नई कहानी

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बदलते दौर में खेती अब सिर्फ धान और गेहूं तक सीमित नहीं रह गई है। किसानों की बढ़ती जागरूकता और नई कृषि तकनीकों की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इसी बदलाव की तस्वीर बक्सर जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत कुल्हड़िया गांव में देखने को मिली, जहां एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर सेंटर) में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पूसा समस्तीपुर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक दयाराम के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों को मशरूम उत्पादन और प्रसंस्करण की तकनीकी जानकारी दी गई।

 

प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि पुरुष किसानों के साथ बड़ी संख्या में महिला किसान भी मौजूद रहीं। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को देखकर वैज्ञानिक दयाराम ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं खेती-किसानी से लेकर हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। इससे साफ दिखाई दे रहा है कि देश की आधी आबादी अब सिर्फ जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि आत्मनिर्भरता और विकास का नया इतिहास लिखने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती के जरिए किसानों की आय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। केवल धान और गेहूं के उत्पादन पर निर्भर रहकर किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। ऐसे में मशरूम उत्पादन किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकता है। मशरूम कम लागत में अधिक लाभ देने वाली फसल है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी के साथ लोगों तक पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी पहुंच सकेगा।

 

वैज्ञानिक दयाराम ने कहा कि मशरूम उत्पादन किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना सकता है। इसके लिए बड़े भूभाग की जरूरत नहीं होती और कम संसाधनों में भी इसका उत्पादन संभव है। यही कारण है कि आज ग्रामीण क्षेत्रों में किसान तेजी से इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। मशरूम उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल एफपीओ सदस्यों ने बताया कि गांव-गांव में महिलाएं मशरूम उत्पादन को लेकर जागरूक हो रही हैं। कम लागत और कम समय में बेहतर उत्पादन के कारण किसान इससे अच्छी कमाई कर रहे हैं। किसानों ने कहा कि यदि वैज्ञानिक तरीके से मशरूम की खेती की जाए तो छोटे से जमीन के टुकड़े पर भी सालाना लाखों रुपये तक की आय अर्जित की जा सकती है।

वहीं एफपीओ के सीईओ दीपू कुमार ने कहा कि मशरूम की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए बड़े खेत या अधिक भूमि की आवश्यकता नहीं होती। जिन किसानों के पास खेती के लिए पर्याप्त जमीन नहीं है, वे भी अपने घरों में इसका उत्पादन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि छोटे-छोटे कमरों में भी मशरूम उत्पादन संभव है और घरेलू कामकाज के साथ महिलाएं भी आसानी से इसे कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं घर बैठे मशरूम उत्पादन कर हजारों रुपये प्रतिमाह की कमाई कर रही हैं। इससे एक ओर जहां परिवार की आय में बढ़ोतरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर पौष्टिक भोजन भी लोगों तक पहुंच रहा है। मशरूम उत्पादन कुपोषण को दूर करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी माध्यम बनता जा रहा है।

 

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