बक्सर के नवनिर्मित रेल ओवरब्रिज का ध्वस्त होना डबल इंजन सरकार के भ्रष्टाचार का जीता-जागता प्रमाण — सांसद सुधाकर सिंह


न्यूज़ विज़न। बक्सर
बक्सर जिला के इटाढ़ी गुमटी (एलसी संख्या-70B) के समीप बक्सर-बरूना रेलवे स्टेशन खंड के बीच लगभग 26.40 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रेल ओवरब्रिज का ध्वस्त होना अत्यंत गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण एवं भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण है। यह अत्यंत शर्मनाक है कि जिस पुल का अभी तक औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ था और जिसे मात्र लगभग दस दिन पूर्व आम जनता के आवागमन के लिए खोला गया था, वह पहले ही क्षतिग्रस्त होकर ढह गया।
सांसद सुधाकर सिंह ने इस घटना को केंद्र एवं बिहार सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि भाजपा की तथाकथित “डबल इंजन सरकार” विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन बक्सर का यह पुल उन दावों की वास्तविकता को उजागर कर रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पुल का उद्घाटन से पहले ही ध्वस्त हो जाना यह सिद्ध करता है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता, निगरानी एवं जवाबदेही का पूर्ण अभाव था। उन्होंने कहा कि जिस स्तर की सामग्री का उपयोग इस पुल के निर्माण में किया गया है, वैसी निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग कोई व्यक्ति अपने निजी मकान के निर्माण में भी नहीं करेगा। यह कोई साधारण तकनीकी विफलता नहीं बल्कि भ्रष्टाचार, मिलीभगत और जनता के धन की खुली लूट का मामला है।
सुधाकर सिंह ने यह भी कहा कि इस रेल ओवरब्रिज के चालू होने के बाद 31 मई 2026 को बक्सर स्टेशन के पूर्वी दिशा स्थित रेल फाटक को बंद कर दिया गया था। अब जबकि ओवरब्रिज स्वयं असुरक्षित एवं क्षतिग्रस्त साबित हो चुका है, आम जनता को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सांसद सुधाकर सिंह ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं समयबद्ध जांच कराई जाए तथा निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार, अभियंता, गुणवत्ता निरीक्षक एवं संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने दोषियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की भी मांग की है।
साथ ही उन्होंने 31 मई 2026 से बंद बक्सर स्टेशन के पूर्वी रेल फाटक को तत्काल प्रभाव से पुनः खोलने की मांग करते हुए कहा कि जनता की सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। सुधाकर सिंह ने कहा कि बक्सर की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर 26.40 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद ऐसा पुल कैसे बना जो उद्घाटन से पहले ही जवाब दे गया। जनता के धन की बर्बादी और लोगों की जान से खिलवाड़ किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।





