शहीद इंस्पेक्टर मोहम्मद असलम को भावभीनी श्रद्धांजलि, पूर्व CRPF जवानों ने परिजनों को सौंपा ₹21 हजार का सहयोग
वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ Ex CRPF वॉरियर्स ने केसठ पहुंचकर जताई संवेदना, कहा— हर परिस्थिति में परिवार के साथ खड़े रहेंगे CRPF जवान


न्यूज़ विज़न। बक्सर
जिले के केसठ प्रखंड निवासी CRPF के शहीद इंस्पेक्टर मोहम्मद असलम के निधन के बाद उनके परिवार के प्रति संवेदना और सहयोग का सिलसिला लगातार जारी है। बीमारी के कारण 17 मई को उनका निधन हो गया था, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। उनके निधन के बाद सोमवार को वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ Ex CRPF वॉरियर्स के पदाधिकारी एवं जवान उनके पैतृक गांव केसठ पहुंचे और परिजनों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ₹21 हजार की सहयोग राशि प्रदान की।
इस दौरान एसोसिएशन के सदस्यों ने दिवंगत इंस्पेक्टर मोहम्मद असलम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उपस्थित पूर्व एवं वर्तमान CRPF जवानों ने कहा कि इंस्पेक्टर मोहम्मद असलम ने अपने सेवा काल में देश की सुरक्षा और राष्ट्रसेवा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उनका निधन न केवल परिवार बल्कि पूरे CRPF परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। कार्यक्रम में वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ Ex CRPF वॉरियर्स के अध्यक्ष एवं पूर्व हवलदार रितेश कुमार पांडेय ने कहा कि संगठन का उद्देश्य अपने साथी जवानों और उनके परिवारों के सुख-दुख में सहभागी बनना है। उन्होंने कहा कि मोहम्मद असलम के परिवार को किसी भी प्रकार की आवश्यकता होने पर CRPF परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा।
इस अवसर पर एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष एवं पूर्व इंस्पेक्टर छोटेलाल सिंह, सचिव एवं पूर्व सहायक उपनिरीक्षक (ASI) गोपाल जी, वर्तमान CRPF जवान मोहम्मद नियाज़ अहमद (डेहरी, चौसा), राज किशोर (डुमरांव), मनीष कुमार (पुराना भोजपुर) सहित कई पूर्व एवं वर्तमान जवान मौजूद रहे। सभी उपस्थित जवानों ने एक स्वर में कहा कि इंस्पेक्टर मोहम्मद असलम की सेवाओं और उनके व्यक्तित्व को हमेशा याद रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने परिवार को हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाते हुए कहा कि पूरे बक्सर जिले के CRPF जवान इस दुख की घड़ी में उनके परिजनों के साथ हैं और आगे भी हर परिस्थिति में साथ खड़े रहेंगे। इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वर्दी का रिश्ता केवल सेवा काल तक सीमित नहीं होता, बल्कि साथी जवानों और उनके परिवारों के प्रति जिम्मेदारी और अपनापन जीवनभर बना रहता है।





