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 ‘खेत बचाव अभियान’ का शुभारम्भ, मिट्टी की सेहत सुधारने और रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाने पर जोर

आईसीएआर पटना के मार्गदर्शन में महदह गांव से अभियान का शुभारंभ, जून भर जिले के सभी प्रखंडों में चलेंगे जागरूकता कार्यक्रम

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से सोमवार को बक्सर जिले के महदह गांव में राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम “खेत बचाव अभियान” का शुभारंभ किया गया। यह अभियान आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) पटना के निदेशक डॉ. अनूप दास के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। अभियान का मुख्य उद्देश्य खेतों की मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखना, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है।

 

कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध और अविवेकपूर्ण उपयोग से खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरता, जलधारण क्षमता और जैविक सक्रियता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

 

हरी खाद और दलहनी फसलों को अपनाने की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर के वैज्ञानिक श्री हरिगोविंद एवं डॉ. रामकेवल ने उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसल चक्र में दलहनी फसलों जैसे चना, मसूर, उड़द और अरहर को शामिल करना अत्यंत आवश्यक है। इससे मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है। उन्होंने किसानों को हरी खाद के रूप में ढैंचा, मूंग और लोबिया जैसी फसलों की खेती करने की सलाह दी। वैज्ञानिकों ने बताया कि इन फसलों के उपयोग से मिट्टी की संरचना बेहतर होती है तथा उसकी उत्पादक क्षमता बढ़ती है।

मृदा जांच के बाद ही करें उर्वरकों का प्रयोग
विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा जांच के महत्व से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि खेत की मिट्टी की जांच करवाने के बाद ही अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। इससे अनावश्यक खर्च कम होगा और मिट्टी का संतुलन भी बना रहेगा। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की अम्लीयता एवं क्षारीयता का संतुलन बिगड़ रहा है, जबकि लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता भी घट रही है। इसका सीधा असर उत्पादन और मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता पर पड़ता है।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। वैज्ञानिकों ने जीवामृत, बीजामृत और घनामृत जैसे प्राकृतिक उत्पादों के उपयोग की जानकारी दी। साथ ही मिश्रित उर्वरकों के प्रयोग के माध्यम से डीएपी और यूरिया पर निर्भरता कम करने की सलाह दी गई। उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप खेती करें तो रासायनिक उर्वरकों की खपत में 20 से 25 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है, जिससे लागत घटेगी और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा।

30 से अधिक किसानों ने लिया भाग
महदह गांव में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में जीउत सिंह, अरविंद सिंह, राकेश कुमार सिंह, जयप्रकाश सिंह, मनु यादव, धर्मेंद्र राजभर, विकास कुमार सिंह, चंद्रभूषण सिंह, शिवचरण पाल, सूरज पासवान, शशांक कुमार सिंह, अशोक कुमार सिंह, सत्यनारायण यादव सहित 30 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।

30 जून तक चलेगा अभियान
कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि 1 जून से 30 जून तक यह अभियान बक्सर जिले के सभी प्रखंडों में चलाया जाएगा। इसके माध्यम से किसानों को मिट्टी संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।

 

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