मुजफ्फरपुर साहित्य महोत्सव 2026 में डॉ. मनीष कुमार शशि सम्मानित, लेखनी से समाज को दिशा देने का संदेश
राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में भारत-नेपाल-श्रीलंका के रचनाकारों की सहभागिता, बक्सर के शिक्षक-लेखक की उपलब्धि पर शिक्षकों में खुशी की लहर


न्यूज़ विज़न। बक्सर
साहित्य समाज का दर्पण होता है, जिसके माध्यम से हम अपने समय और परिवेश का ज्वलंत प्रतिबिंब प्रस्तुत करते हैं। साहित्य और संगीत का संबंध सदियों पुराना और गहरा रहा है। कवि, लेखक, कथाकार, कलमकार और नाटककार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज को ऊर्जा देने के साथ-साथ उसे सोचने और बदलने की दिशा भी प्रदान करते हैं।
उक्त विचार शिक्षक डॉ. मनीष कुमार शशि ने मुजफ्फरपुर साहित्य महोत्सव सम्मान 2026 प्राप्त करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज के उत्थान और चेतना का माध्यम है। विदित हो कि एम.एस. केसरी पब्लिकेशन, भारत द्वारा विगत दिवस मुजफ्फरपुर में राष्ट्रीय स्तर का भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इस आयोजन में भारत के साथ-साथ नेपाल और श्रीलंका के कवियों ने भी अपनी रचनाओं से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई और साहित्यिक समागम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। बक्सर जिले के डुमरांव (हरिजी हाता) निवासी डॉ. मनीष कुमार शशि न केवल बिहार सरकार द्वारा सम्मानित शिक्षक हैं, बल्कि एक कुशल वक्ता और सशक्त लेखक के रूप में भी राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। वे प्रगतिशील लेखक संघ बक्सर सहित विभिन्न साहित्यिक मंचों के माध्यम से समाज के ज्वलंत मुद्दों को उठाते रहे हैं।
उनकी इस उपलब्धि पर शिक्षक समाज में हर्ष का माहौल है। प्रधानाध्यापक डॉ. सुरेंद्र कुमार सिंह, विकास कुमार, अशफाक आलम, ब्रजेश राय, रमेश कुमार, प्रमोद कुमार चौबे, धनंजय मिश्रा, धीरज मिश्रा, निखत फातमा, सीमा ओझा, अनीता यादव, सारिका चौधरी, अरविन्द प्रियदर्शी, सिराजुल इस्लाम, दीप्ति साहू, तबरेज खान, आकांक्षा यादव और रिंकी कुमारी सहित कई शिक्षकों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। डॉ. मनीष कुमार शशि की शालीनता, सरल व्यक्तित्व और सशक्त लेखनी के कारण शिक्षक समाज में उनकी एक अलग पहचान बनी हुई है। शिक्षा विभाग की ओर से भी उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि बक्सर जिले के लिए भी गौरव का विषय बन गया है।





