OTHERS

आनंदमयी अधिगम और संचार कौशल पर जोर, वार्षिक आचार्य कार्यशाला के दूसरे दिन शिक्षकों ने बनाई नई रणनीति

सरस्वती विद्या मंदिर, सिविल लाइंस में आयोजित कार्यशाला में ‘जॉयफुल लर्निंग’ से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन तक हुई गहन चर्चा

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर, सिविल लाइंस में चल रही वार्षिक आचार्य कार्यशाला के द्वितीय दिवस पर शिक्षण पद्धति को आधुनिक और प्रभावी बनाने को लेकर व्यापक मंथन किया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं के संचार कौशल के विकास, विषयों की गहरी अवधारणा के हस्तांतरण तथा कक्षा में आनंदमयी अधिगम (Joyful Learning) को और बेहतर बनाने के लिए विस्तृत चर्चा एवं कार्ययोजना तैयार की गई।

 

कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य शैलेन्द्र कुमार ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ बच्चों के जन्म से लेकर उनके मानसिक एवं शारीरिक विकास की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार यह विकास बच्चों के चरित्र निर्माण और उनके सोचने के दृष्टिकोण को प्रभावित करता है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों के भौतिक विकास के साथ-साथ उनके नैतिक एवं चारित्रिक निर्माण पर भी विशेष ध्यान दें। कार्यशाला के दौरान ‘जॉयफुल लर्निंग’ को व्यवहारिक रूप देने के लिए आचार्या रंजू सिन्हा एवं विभा राय द्वारा ‘हेल्दी फूड बनाम जंक फूड’ विषय पर एक डेमो कक्षा प्रस्तुत की गई, जिसे शिक्षकों ने काफी सराहा। इस प्रस्तुति के माध्यम से यह बताया गया कि किस प्रकार रोचक और सहभागितापूर्ण तरीके से पढ़ाई को बच्चों के लिए आनंददायक बनाया जा सकता है।

 

वहीं, आचार्य कुणाल कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत पाठ्यक्रम के समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण तकनीकों को अपनाने और स्वयं को निरंतर अपडेट रखने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में विद्या भारती के पूर्व प्रधानाचार्य बीरेंद्र सिंह की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने शिक्षकों को अपने विषय ज्ञान के साथ-साथ अन्य विषयों की भी जानकारी रखने और स्वयं को बहुआयामी बनाने की प्रेरणा दी। इसके अलावा, कार्यशाला के दौरान आचार्य दीदी जी के लिए कई रोचक प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिससे वातावरण उत्साहपूर्ण बना रहा। कार्यशाला का समापन तीसरे दिन किया जाएगा, जिसमें दो दिनों के अनुभवों और सुझावों के आधार पर आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत की जाएगी।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button