भोजपुरी साहित्य जगत के लिए गौरवपूर्ण क्षण
वीकेएसयू में शोधार्थी राजेश कुमार आदित्य की पी-एच.डी. मौखिकी सम्पन्न, डॉ. अरुण मोहन भारवि के रचना-संसार पर शोध को मिली सराहना


न्यूज़ विज़न। बक्सर
डॉ. अरुण मोहन भारवि के साहित्यिक अवदान पर किया गया शोध सोमवार 11 मई को भोजपुरी साहित्य-जगत और अकादमिक परंपरा के लिए एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के भोजपुरी विभाग में शोधार्थी राजेश कुमार आदित्य द्वारा प्रस्तुत शोधप्रबंध “डॉ. अरुण मोहन भारवि के रचना संसार” पर पी-एच.डी. की मौखिकी परीक्षा सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई।
यह अवसर केवल एक शोधार्थी की शैक्षणिक सफलता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भोजपुरी साहित्य की समृद्ध परंपरा और उसके गंभीर अकादमिक अध्ययन के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। कार्यक्रम में भोजपुरी विभागाध्यक्ष प्रो. दिवाकर पाण्डेय, शोध निर्देशिका डॉ. उषा रानी, प्रो. सिद्धार्थ शंकर तथा स्वयं साहित्यकार डॉ. अरुण मोहन भारवि की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके अतिरिक्त प्रसिद्ध कथाकार कृष्ण कुमार, प्रो. नीरज सिंह, डॉ. कौशल्या शर्मा सहित विभाग के शोधार्थियों रवि प्रकाश सूरज, यशवंत कुमार, संजय कुमार, सोहित सिन्हा, धुनमुन सिंह एवं रश्मि कुमारी की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
मौखिकी परीक्षा के शोध परीक्षक प्रो. जंग बहादुर पांडेय ने अपने प्रतिवेदन में शोधप्रबंध को भोजपुरी कथा साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. अरुण मोहन भारवि की समग्र साहित्य-साधना पर आधारित एक मौलिक, प्रामाणिक एवं गंभीर अकादमिक कृति बताया। उन्होंने कहा कि शोधार्थी ने साहित्यकार के व्यक्तित्व एवं बहुआयामी कृतित्व का सूक्ष्म और शोधपरक विवेचन प्रस्तुत किया है। शोधप्रबंध को सात सुव्यवस्थित अध्यायों में विभाजित किया गया है। प्रथम अध्याय में डॉ. भारवि के व्यक्तित्व का विस्तृत परिचय, द्वितीय अध्याय में उनके समग्र रचना-संसार का अवलोकन, तृतीय अध्याय में कथा साहित्य का विश्लेषण, चतुर्थ अध्याय में संपादन-कला का विवेचन, पंचम अध्याय में फुटकर रचनाओं का मूल्यांकन तथा षष्ठ अध्याय में उनकी साहित्यिक विशेषताओं पर गहन विमर्श किया गया है। वहीं सप्तम अध्याय में शोध के निष्कर्षों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया है।
शोध की विशेषता यह भी रही कि परिशिष्ट में डॉ. भारवि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर कई प्रतिष्ठित साहित्यकारों के साक्षात्कारों को शामिल किया गया है, जिससे शोध की प्रामाणिकता और अधिक मजबूत हुई है। इस अवसर पर प्रो. दिवाकर पाण्डेय, प्रो. सिद्धार्थ शंकर एवं डॉ. उषा रानी ने कहा कि डॉ. अरुण मोहन भारवि के समग्र भोजपुरी साहित्य पर यह शोध एक सम्यक, सार्थक एवं मौलिक विमर्श प्रस्तुत करता है। उन्होंने इसे भोजपुरी साहित्य के अकादमिक अध्ययन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
ज्येष्ठ मास में सम्पन्न इस मौखिकी को लेकर उपस्थित विद्वानों ने कहा कि शोधार्थी राजेश कुमार आदित्य और शोध-नायक डॉ. अरुण मोहन भारवि—दोनों ही इस उपलब्धि के माध्यम से वास्तविक अर्थों में “ज्येष्ठ” सिद्ध हुए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर भोजपुरी साहित्य मंडल के महासचिव डॉ. वैरागी प्रभाष चतुर्वेदी, सचिव अमरेंद्र दुबे, प्रचार सचिव कौशल शर्मा तथा अखिल भारतीय जायसवाल (सर्ववर्गीय) महासभा के राष्ट्रीय मुख्य संरक्षक बालेश्वर दयाल जायसवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष मदनलाल प्रभाती लाल जायसवाल, राष्ट्रीय महासचिव आदित्य वर्धनम, साहित्यकार कृष्ण कुमार एवं कवि शिव बहादुर पांडेय ‘प्रीतम’ ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के भोजपुरी विभाग को हार्दिक बधाई एवं साधुवाद प्रेषित किया।





