भोजपुरी के संवैधानिक अधिकार को लेकर एमवी कॉलेज में हुआ संवाद
संवाद-श्रृंखला में भाषा के संरक्षण, संवर्धन और संवैधानिक पहचान पर हुई चर्चा, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राएं हुए सम्मानित


न्यूज़ विज़न। बक्सर
जिले के महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय (एमवी कॉलेज), बक्सर में शब्दन फाउंडेशन एवं महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संवाद-श्रृंखला के अंतर्गत “भोजपुरी के संवैधानिक अधिकार” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जमानियाँ विधायक ओम प्रकाश सिंह, भोजपुरी विभागाध्यक्ष, महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय के प्राचार्य सहित कई गणमान्य लोग एवं अन्य साथी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान भोजपुरी भाषा के संवैधानिक अधिकार, इसके संरक्षण एवं संवर्धन तथा समृद्ध भाषायी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से संवाद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भोजपुरी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि यह हमारी मिट्टी की खुशबू, लोकजीवन की आत्मा और करोड़ों लोगों की पहचान एवं स्वाभिमान से जुड़ी भाषा है। भोजपुरी की मिठास में लोकपरंपराओं की झलक दिखाई देती है, जबकि इसकी बोली में गांव-घर की संस्कृति और इसके साहित्य में हमारी समृद्ध सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत समाहित है। लोकगीत, लोककथाएं, साहित्य, रंगमंच और सिनेमा के माध्यम से भोजपुरी ने देश की सीमाओं से बाहर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। दुनिया के अनेक हिस्सों में भोजपुरी भाषी समुदायों की मौजूदगी ने इस भाषा को व्यापक सांस्कृतिक पहचान दिलाई है।
संवाद के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि भोजपुरी को उसका उचित सम्मान एवं संवैधानिक पहचान दिलाने के लिए सामाजिक और बौद्धिक स्तर पर निरंतर संवाद आवश्यक है। भाषा के संरक्षण के साथ-साथ उसके साहित्य, लोककला, लोकगीत और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजना भी महत्वपूर्ण है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जुड़ी रहें तथा अपनी विरासत पर गर्व कर सकें। कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि भोजपुरी के भविष्य को मजबूत बनाने में नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने भी भाषा एवं संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया। कार्यक्रम ने भोजपुरी भाषा के प्रति युवाओं और समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ इसके संवैधानिक अधिकार और सांस्कृतिक महत्व को लेकर सार्थक संवाद का अवसर प्रदान किया।





