बक्सर में ‘बोधिका’ के अक्टूबर अंक का लोकार्पण, शैक्षिक नवाचारों और शिक्षकों की रचनात्मकता को मिलेगा नया मंच
जिला शिक्षा पदाधिकारी इन्द्र कुमार कर्ण समेत शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया ई-पत्रिका का विमोचन, बोले अधिकारी— शिक्षकों के अनुभवों, विद्यार्थियों की प्रतिभा और उत्कृष्ट शैक्षिक गतिविधियों को साझा करने में अहम भूमिका निभाएगी ‘बोधिका’

न्यूज़ विज़न। बक्सर
जिले में शैक्षिक नवाचार, शिक्षकों की रचनात्मकता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में शिक्षा विभाग की मासिक शैक्षिक ई-पत्रिका ‘बोधिका’ लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी कड़ी में अक्टूबर-2026 अंक जारी किया गया। इस अंक का लोकार्पण जिला शिक्षा पदाधिकारी इन्द्र कुमार कर्ण, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (EE & SSA) अनन्या, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) सुरेश प्रसाद, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के व्याख्याता डॉ. नवनीत सिंह तथा पत्रिका के संपादन मंडल के सदस्यों ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों और संपादन टीम के सदस्यों ने ‘बोधिका’ को जिले में हो रहे शैक्षिक प्रयासों, शिक्षकों के अभिनव प्रयोगों और विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सामने लाने वाला प्रभावी डिजिटल मंच बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विद्यालयों में किए जा रहे अच्छे कार्यों, नए प्रयोगों और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों को साझा करना आवश्यक है। ऐसी पहल से शिक्षकों को एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
शिक्षा पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं, नवाचार और निरंतर सीखना भी जरूरी : इन्द्र कुमार कर्ण
लोकार्पण के अवसर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी इन्द्र कुमार कर्ण ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नवाचार, रचनात्मकता और निरंतर सीखने की प्रक्रिया है। ‘बोधिका’ शिक्षकों और विद्यार्थियों की प्रतिभा, उपलब्धियों तथा अभिनव प्रयोगों को सामने लाने का एक प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि यह पत्रिका जिले की शैक्षिक गतिविधियों को दस्तावेजीकृत करने के साथ-साथ अन्य शिक्षकों को भी बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगी। विद्यालयों में होने वाले सकारात्मक प्रयासों को व्यापक स्तर पर साझा करने से शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच विकसित होगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में अनुभवों का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण : अनन्या
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (EE & SSA) अनन्या ने अपने संबोधन में कहा कि प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षकों के अनुभवों, नवाचारों और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों को साझा करना अत्यंत आवश्यक है। ‘बोधिका’ शिक्षकों को अपने प्रयासों और सफल प्रयोगों को सामने लाने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मंच से विद्यालयों में सीखने-सिखाने की प्रक्रिया को अधिक रोचक, समावेशी और प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। शिक्षकों के अच्छे अनुभव दूसरे विद्यालयों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। इससे प्रारंभिक शिक्षा को बेहतर बनाने और बच्चों की सीखने की क्षमता को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को नई दिशा मिल सकती है।
विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन और जीवनोपयोगी कौशल विकसित करने पर जोर
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) सुरेश प्रसाद ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उनमें तार्किक चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता और जीवनोपयोगी कौशलों का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि ‘बोधिका’ में प्रकाशित शैक्षिक गतिविधियां, विद्यार्थियों की उपलब्धियां और शिक्षकों के नवाचार इस दिशा में प्रेरणादायी भूमिका निभा सकते हैं। पत्रिका के माध्यम से जिले के विद्यालयों में किए जा रहे बेहतर कार्यों को पहचान मिलेगी और अन्य शिक्षक भी नई शिक्षण विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। यह पहल जिले की शैक्षिक प्रगति को नई पहचान देने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा को प्रभावी बनाने की पहल
DIET के व्याख्याता डॉ. नवनीत सिंह ने ‘बोधिका’ को शिक्षकों के व्यावसायिक विकास, शैक्षिक नवाचारों के आदान-प्रदान और ज्ञान के प्रसार का सशक्त डिजिटल मंच बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षा को अनुभवात्मक, गतिविधि-आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पत्रिका के माध्यम से विद्यालयों में किए जा रहे प्रभावी प्रयोगों, स्थानीय संदर्भों पर आधारित शिक्षण गतिविधियों और शिक्षकों के रचनात्मक प्रयासों को व्यापक स्तर पर साझा किया जा सकता है। इससे शिक्षकों को अपने अनुभवों को अभिव्यक्त करने का अवसर मिलेगा और शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी विचारों का प्रसार भी होगा।
डिजिटल मंच से मजबूत होगी जिले की शैक्षिक पहचान
शिक्षा विभाग, बक्सर की मासिक ई-पत्रिका ‘बोधिका’ जिले में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक प्रयासों को डिजिटल मंच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य विद्यालयों में संचालित उत्कृष्ट गतिविधियों, शिक्षकों के अनुभवों, विद्यार्थियों की प्रतिभा और शिक्षा से जुड़े समसामयिक विषयों को अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाना है। डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध यह पत्रिका जिले की शैक्षिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से संकलित करने के साथ-साथ शिक्षा जगत में संवाद, सहयोग और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा दे रही है। इसके माध्यम से विद्यालयों में किए जा रहे रचनात्मक कार्यों को साझा करने, शिक्षकों के अनुभवों से दूसरे शिक्षकों को लाभ पहुंचाने और विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सामने लाने का अवसर मिलता है। अक्टूबर-2026 का अंक भी इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। ‘बोधिका’ के माध्यम से शिक्षा विभाग की गतिविधियों, शैक्षिक उपलब्धियों और नवाचारों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्रोत्साहित करने की दिशा में सार्थक कदम माना जा रहा है।
संपादन मंडल के सदस्य रहे उपस्थित
‘बोधिका’ के अक्टूबर अंक के लोकार्पण के अवसर पर पत्रिका की संपादन टीम से सुरेंद्र जी, रामभजन राम, विमल कुमार सिंह, डॉ. मृत्युंजय राय, राजेश कुमार, रविशंकर गुप्ता, रवि कुमार, महताब अली, सोनम कुमारी और सुगंधा कुमारी समेत अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने पत्रिका के माध्यम से जिले की शैक्षिक गतिविधियों, शिक्षकों के नवाचारों और विद्यार्थियों की प्रतिभा को अधिक व्यापक स्तर पर सामने लाने के प्रयास को महत्वपूर्ण बताया। कुल मिलाकर, ‘बोधिका’ का अक्टूबर-2026 अंक बक्सर जिले की शैक्षिक गतिविधियों, रचनात्मक प्रयासों और नवाचारों को संकलित करने के साथ-साथ शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने की पहल को आगे बढ़ाता है। उम्मीद है कि यह डिजिटल मंच जिले में बेहतर शिक्षण पद्धतियों के प्रसार और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए उपयोगी साबित होगा।




