चौसा रामलीला मंच का ताला खुला, प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बनी सहमति
एसडीएम अविनाश कुमार ने कार्रवाई पर जताया खेद, ईओ रानी कुमारी ने स्वयं खोला ताला; चार घंटे से अधिक समय तक नगर पंचायत कार्यालय में जारी रहा विरोध

न्यूज़ विज़न। बक्सर/चौसा
बक्सर जिले के चौसा बाजार स्थित साक्षरता भवन सह रामलीला मंच पर ताला लगाए जाने को लेकर मंगलवार से जारी विवाद बुधवार को समाप्त हो गया। सदर एसडीएम अविनाश कुमार और एसडीपीओ गौरव पांडेय की पहल पर प्रशासन तथा स्थानीय नागरिकों के बीच सहमति बन गई। इसके बाद एसडीएम ने हुई कार्रवाई पर खेद जताया, जबकि चौसा नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने स्वयं साक्षरता भवन सह रामलीला मंच का ताला खोल दिया। लंबे समय से चली आ रही रामलीला परंपरा को लेकर उत्पन्न विवाद के समाप्त होने के बाद स्थानीय लोगों ने राहत जताई।
रामलीला मंच पर ताला लगने से भड़का आक्रोश
मामले की शुरुआत मंगलवार शाम हुई, जब चौसा बाजार स्थित साक्षरता भवन सह रामलीला मंच की कायाकल्प योजना के तहत जांच की जा रही थी। जांच के दौरान परिसर में गंदगी मिलने के बाद कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने परिस्थितिवश भवन में ताला लगा दिया। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। लोगों ने इसे चौसा की ऐतिहासिक सांस्कृतिक परंपरा और धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए विरोध जताया। स्थानीय नागरिकों का कहना था कि चौसा में पिछले 102 वर्षों से रामलीला की परंपरा चली आ रही है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। ऐसे में रामलीला मंच पर ताला लगाए जाने से लोगों की भावनाएं आहत हुईं। लोगों ने मांग की कि रामलीला मंच को तत्काल खोला जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही परंपरा प्रभावित न हो।
नगर पंचायत कार्यालय में चार घंटे से अधिक समय तक तालाबंदी
रामलीला मंच पर ताला लगाए जाने के विरोध में बुधवार को स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया। विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने नगर पंचायत कार्यालय में चार घंटे से अधिक समय तक तालाबंदी कर दी। इस दौरान लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए मंच को खोलने और रामलीला के आयोजन में किसी प्रकार की बाधा नहीं डालने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि किसी भवन में गंदगी मिलने पर साफ-सफाई और व्यवस्था सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं, लेकिन इसके कारण ऐतिहासिक रामलीला मंच को बंद करना उचित नहीं है। लोगों ने प्रशासन से मामले का समाधान निकालने और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा को जारी रखने की अपील की।
एसडीएम और एसडीपीओ की पहल पर निकला समाधान
मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीएम अविनाश कुमार और एसडीपीओ गौरव पांडेय नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने स्थानीय नागरिकों से बातचीत कर उनकी समस्याएं और आपत्तियां सुनीं। इसके बाद अधिकारियों ने साक्षरता भवन सह रामलीला मंच पहुंचकर मामले का समाधान निकालने की पहल की। मौके पर एसडीएम अविनाश कुमार ने कार्रवाई पर खेद जताया। वहीं, कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने स्वयं आगे बढ़कर भवन का ताला खोल दिया। ताला खुलते ही स्थानीय लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। इसके साथ ही मंगलवार से जारी विवाद समाप्त हो गया और स्थिति सामान्य हो गई।
एसडीएम बोले—रामलीला बंद नहीं होनी चाहिए थी
इस मामले पर एसडीएम अविनाश कुमार ने स्पष्ट कहा कि रामलीला बंद नहीं होनी चाहिए थी। यदि किसी प्रकार की समस्या थी, तो बैठक और आपसी बातचीत के माध्यम से उसका समाधान निकाला जा सकता था। प्रशासन का प्रयास है कि स्थानीय लोगों की भावनाओं और क्षेत्र की परंपराओं का सम्मान करते हुए विवादों का शांतिपूर्ण समाधान किया जाए। वहीं, कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने कहा कि रामलीला रोकना उनकी मंशा नहीं थी। प्रशासनिक पहल और बातचीत के बाद भवन का ताला खोल दिया गया। इससे मामले पर सहमति बन गई।
102 साल पुरानी परंपरा को लेकर संवेदनशीलता की मांग
चौसा की रामलीला एक सदी से अधिक समय से चली आ रही परंपरा है। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा है। यही वजह रही कि रामलीला मंच पर ताला लगाए जाने का मामला जल्द ही विरोध का विषय बन गया। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों की पहल और आपसी बातचीत से विवाद का पटाक्षेप हो गया। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों द्वारा मामले को गंभीरता से लेने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की सराहना की। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सार्वजनिक स्थलों की व्यवस्था और साफ-सफाई बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय परंपराओं, धार्मिक आयोजनों तथा जनभावनाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है।
वीडियो देखें :




