रामलीला में गूंजा भक्ति और धर्म का संदेश, जयंत प्रसंग से लेकर सूर्पणखा की नासिका काटने तक हुआ भावपूर्ण मंचन
कृष्णलीला में नरसी मेहता की अटूट भक्ति और ‘हुंडी’ प्रसंग ने जीता दर्शकों का दिल, पंचवटी में श्रीराम-लक्ष्मण से मिली सूर्पणखा

न्यूज़ विज़न। बक्सर
श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में ऐतिहासिक किला मैदान स्थित विशाल रामलीला मंच पर चल रहे 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को दिन में कृष्णलीला और देर रात रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। वृंदावन से पधारे श्री बाल कृष्ण रासलीला एवं रामलीला मंडल के निर्देशक स्वामी श्री मोहन श्याम भारद्वाज के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत धार्मिक एवं पौराणिक प्रसंगों ने दर्शकों को भक्ति, आस्था और धर्म के संदेश से भावविभोर कर दिया। लीला के दौरान पूरे परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।
जयंत के अहंकार से प्रभु की शरणागति तक का हुआ मंचन
देर रात मंचित रामलीला में माता सीता की प्रभु श्रीराम के प्रति भक्ति, जयंत के अहंकार, उसके अपराध और अंततः प्रभु श्रीराम की शरण में आने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार कौवे का वेश धारण कर जयंत ने माता सीता के चरण में चोट पहुंचाई। इससे क्रोधित होकर प्रभु श्रीराम ने उस पर अग्निबाण छोड़ दिया। अग्निबाण से बचने के लिए जयंत ने इंद्र, भगवान शिव और ब्रह्मा जी सहित अनेक देवताओं की शरण ली, लेकिन उसके अपराध के कारण किसी ने भी उसे आश्रय नहीं दिया। अंततः नारद जी की सलाह पर जयंत प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचा। भगवान श्रीराम ने उसे उसके अपराध का दंड देने के साथ अपनी कृपा भी प्रदान की। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने यह संदेश दिया कि अहंकार व्यक्ति को विनाश की ओर ले जाता है, जबकि सच्ची शरणागति से प्रभु की कृपा प्राप्त हो सकती है।
अनसूइया ने माता सीता को बताया नारी धर्म का महत्व
इसके बाद प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। माता अनसूइया ने माता सीता को नारी धर्म, पतिव्रता धर्म और पारिवारिक जीवन के आदर्शों का उपदेश दिया। इसके पश्चात प्रभु श्रीराम ने सरभंग ऋषि को दर्शन देकर उनका उद्धार किया और महर्षि अगस्त्य से मार्गदर्शन प्राप्त किया। महर्षि अगस्त्य के निर्देश के बाद प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी पंचवटी में निवास करने लगे। पंचवटी में भगवान श्रीराम ने लक्ष्मण जी को विभिन्न विषयों पर उपदेश दिया। इसी दौरान रावण की बहन सूर्पणखा वहां पहुंची।
सूर्पणखा के प्रसंग ने दर्शकों में बढ़ाई उत्सुकता
श्रीराम और लक्ष्मण के रूप-सौंदर्य से प्रभावित होकर सूर्पणखा ने उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने के बावजूद जब वह अपने हठ पर अड़ी रही तो लक्ष्मण जी ने उसकी नासिका काट दी। इस प्रसंग का मंचन बेहद प्रभावशाली रहा और दर्शकों में विशेष उत्सुकता देखने को मिली। मंच पर कलाकारों के अभिनय और संवादों ने वातावरण को पूरी तरह राममय बना दिया।
कृष्णलीला में जीवंत हुआ भक्त नरसी मेहता का ‘हुंडी’ प्रसंग
दिन में मंचित कृष्णलीला में भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त नरसी मेहता के जीवन से जुड़ा प्रेरणादायी प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार द्वारका जाने वाले कुछ साधु नरसी मेहता के पास पहुंचे और उनसे पांच सौ रुपये की हुंडी लिखने का आग्रह किया। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण नरसी मेहता ने असमर्थता जताई, लेकिन साधुओं के आग्रह पर उन्होंने हुंडी लिख दी और उसमें द्वारका के सांवल शाह का नाम अंकित कर दिया। द्वारका पहुंचने के बाद साधुओं ने सांवल शाह को काफी खोजा, लेकिन उनका कहीं पता नहीं चला। दूसरी ओर नरसी मेहता ने प्राप्त धन से भंडारे का आयोजन किया। भंडारा समाप्त होने के बाद जब एक वृद्ध संत भोजन के लिए पहुंचे तो नरसी मेहता की पत्नी ने बचे हुए आटे से चार रोटियां बनाकर उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया।
कथा के अनुसार नरसी मेहता की अटूट श्रद्धा, सेवा और भगवान के प्रति विश्वास से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं द्वारका में सांवल शाह के रूप में प्रकट हुए और साधुओं को हुंडी की राशि प्रदान की। इस प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सच्ची भक्ति, निस्वार्थ सेवा और भगवान पर अटूट विश्वास रखने वाले भक्तों की सहायता स्वयं प्रभु करते हैं। भक्त नरसी मेहता की इस भावपूर्ण लीला के मंचन के दौरान दर्शक भावविभोर नजर आए। कलाकारों के अभिनय, संवाद और धार्मिक प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ दिया।
लीला मंचन के दौरान श्री रामलीला समिति के पदाधिकारियों में बैकुण्ठनाथ शर्मा, हरिशंकर गुप्ता, कृष्णा वर्मा, उदय सर्राफ, जोखन जी, नारायण राय, राजकुमार गुप्ता सहित समिति के अन्य सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। विजयादशमी महोत्सव के तहत प्रतिदिन हो रहे लीला मंचन को देखने के लिए किला मैदान में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार जुट रही है।




