‘नीतीश संवाद’ पर AAP का हमला, पूछा- 1996 में जल संधि के समय संसद में क्यों नहीं उठाई आवाज?
आप जिला प्रवक्ता शुभम उपाध्याय ने जदयू पर लगाया ‘संवाद के नाम पर राजनीति’ करने का आरोप, कहा- सत्ता में रहते बिहार के जल हितों के लिए ठोस कदम उठाए सरकार


न्यूज़ विज़न। बक्सर
जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से बक्सर में चलाए जा रहे ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम को लेकर आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आप के जिला प्रवक्ता शुभम उपाध्याय ने प्रेस बयान जारी कर जदयू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि और बिहार के नदी-जल से जुड़े मुद्दों को लेकर जदयू अब जनता के बीच संवाद कार्यक्रम चला रही है, लेकिन जब यह मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण था, तब सत्ता और संसद में रहते हुए क्या कदम उठाए गए, इसका जवाब भी जनता को मिलना चाहिए।
शुभम उपाध्याय ने आरोप लगाया कि 1996 में भारत-बांग्लादेश जल संधि पर हस्ताक्षर के समय नीतीश कुमार तीसरी बार सांसद के रूप में संसद में मौजूद थे। ऐसे में बिहार के जल हितों से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर उन्होंने संसद में विरोध की आवाज क्यों नहीं उठाई, यह सवाल आज भी प्रासंगिक है। आप नेता ने कहा कि जदयू को वर्तमान में ‘नीतीश संवाद’ के जरिए जनता के बीच जाने से पहले अपने पुराने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करना चाहिए।
‘दो दशक से सत्ता में हैं, फिर अब संवाद क्यों?’
आप जिला प्रवक्ता ने कहा कि नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की सत्ता के शीर्ष पर हैं और केंद्र में भी उनकी पार्टी एनडीए सरकार की महत्वपूर्ण सहयोगी है। ऐसे में राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर प्रभाव रखने के बावजूद बिहार के जल अधिकारों के लिए ठोस प्रशासनिक और राजनीतिक पहल क्यों नहीं की गई, यह सवाल जनता पूछ रही है। उन्होंने कहा कि सिर्फ जनता के बीच जाकर संवाद करने से बिहार को उसके हिस्से का जल अधिकार नहीं मिलेगा। इसके लिए केंद्र सरकार के स्तर पर प्रभावी बातचीत, प्रशासनिक पहल और आवश्यक कूटनीतिक कदम उठाने होंगे।
‘संवाद नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरत’
शुभम उपाध्याय ने आरोप लगाया कि जदयू अपनी कथित विफलताओं और राजनीतिक दोहरे रवैये से ध्यान हटाने के लिए ‘नीतीश संवाद’ जैसे कार्यक्रमों का सहारा ले रही है। उन्होंने कहा कि यदि जदयू वास्तव में बिहार के जल हितों को लेकर गंभीर है तो उसे केवल राजनीतिक कार्यक्रम करने के बजाय केंद्र सरकार के साथ मिलकर ठोस निर्णय लेने चाहिए। आप नेता ने कहा कि बिहार की जनता को आश्वासन या संवाद से अधिक अपने जल संसाधनों और नदियों के अधिकार को लेकर परिणाम चाहिए। उन्होंने जदयू से यह भी कहा कि यदि वह केंद्र सरकार की नीतियों से असहमत है तो उसे स्पष्ट राजनीतिक रुख अपनाना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर गठबंधन से अलग होकर जनता के बीच अपने विचार रखने चाहिए।
‘बिहार के हित में जवाबदेही तय हो’
आम आदमी पार्टी ने कहा कि फरक्का जल संधि समेत बिहार की नदियों और जल संसाधनों से जुड़े मुद्दे केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहने चाहिए। इन विषयों पर सरकारों को दीर्घकालिक नीति और ठोस कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि बिहार के हितों की प्रभावी रक्षा हो सके।





