इटाढ़ी गुमटी बंद होने के मामले में हाईकोर्ट पहुंचे सरोज राजभर, रेल मंत्रालय, बक्सर डीएम एसपी समेत 11 के खिलाफ दायर की सिविल रिट
धरना और रेल चक्का जाम के बाद कार्रवाई से नाराजगी, रेलवे व जिला प्रशासन के अधिकारियों समेत 11 को बनाया गया पक्षकार


न्यूज़ विज़न। बक्सर
जिले के नवनिर्मित आरओबी के क्षतिग्रस्त होने के बाद बंद पड़ी इटाढ़ी रेलवे गुमटी को खोलने की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले दलित अति पिछड़ा स्वाभिमान संघर्ष मोर्चा के जिला संयोजक सरोज राजभर ने अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। धरना-प्रदर्शन और रेल चक्का जाम के बाद रेल प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के विरुद्ध सरोज राजभर ने पटना हाईकोर्ट में सिविल रिट दायर की है। इसके बाद उन्होंने प्रेस वार्ता कर आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम और न्यायालय की शरण लेने की जानकारी दी।
सरोज राजभर ने बताया कि इटाढ़ी गुमटी बंद रहने से जिले की जनता को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनता की समस्या को लेकर आंदोलन करने पर प्रशासन की ओर से आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया। इसी को लेकर अब उन्होंने न्यायालय की शरण ली है, ताकि जिले की जनता को न्याय मिल सके। उन्होंने बताया कि सिविल रिट में रेलवे मंत्रालय नई दिल्ली, जीएम हाजीपुर, डीआरएम दानापुर, सीनियर डिविजनल इंजीनियर दानापुर, सीनियर डिविजनल इंजीनियर ब्रिज दानापुर, ईस्ट सेंट्रल रेलवे दानापुर डिवीजन के मुख्य ब्रिज इंजीनियर, स्टेशन सुपरिटेंडेंट बक्सर, बिहार के मुख्य सचिव, बिहार सरकार के सड़क निर्माण विभाग के सचिव, जिला पदाधिकारी बक्सर और पुलिस अधीक्षक बक्सर को पक्षकार बनाया गया है।
सरोज राजभर ने कहा कि अधिकारियों के एसी कार्यालय में बैठकर जनता की समस्याओं को पूरी तरह समझना संभव नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब जनता की समस्या को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन किया गया तो उसे दबाने की कोशिश की गई। अब वे न्यायालय के माध्यम से जनता के अधिकार और समस्या के समाधान की लड़ाई लड़ेंगे।
रेल चक्का जाम के बाद महिला नेत्री ने लगाया दुर्व्यवहार का आरोप
प्रेस वार्ता में दलित अति पिछड़ा अधिकार मंच की महिला जिला अध्यक्ष कृष्णावती देवी ने भी न्यायालय की शरण लेने की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते 7 अगस्त को रेल चक्का जाम के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन समाप्त होने के बाद रेलवे एवं जिला प्रशासन के वरीय अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से रेलवे ट्रैक खाली करने को कहा था। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया था कि प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी तथा 10 दिनों के अंदर गुमटी खोलने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। कृष्णावती देवी के अनुसार, धरना स्थल से निकलने के बाद जब वह अपने साथियों के साथ माल गोदाम के समीप से कलेक्ट्रेट की ओर जा रही थीं, उसी दौरान रेलवे एवं जिला प्रशासन के पुलिस पदाधिकारियों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और अपशब्दों का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वह भी न्यायालय की शरण में गई हैं। कृष्णावती देवी ने कहा कि इटाढ़ी गुमटी समेत जिले की जनता की समस्याओं के समाधान के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
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