सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 पर कांग्रेस का हमला, डॉ. स्नेहाशीष वर्धन बोले- राष्ट्रीय मानकों को दरकिनार कर रही सरकार
नेट-जेआरएफ और पीएचडी अभ्यर्थियों के साथ अन्याय का आरोप, संविदा बहाली के बजाय नियमित नियुक्ति की मांग; उम्र सीमा 55 वर्ष और डोमिसाइल नीति लागू करने का समर्थन


न्यूज़ विज़न। बक्सर
सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 को लेकर बिहार में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नई नियुक्ति नियमावली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 को तैयार करते समय बहाली के राष्ट्रीय मानकों को दरकिनार किया गया है और नेट, जेआरएफ तथा पीएचडी जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
डॉ. वर्धन ने कहा कि राज्य में नियमित नियुक्ति के स्थान पर संविदा आधारित बहाली की व्यवस्था करना बिहार के युवाओं के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की आवश्यकता है और इसके लिए पारदर्शी एवं नियमित नियुक्ति प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
पारंपरिक विषयों तक सीमित पढ़ाई पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बिहार के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में केवल पारंपरिक विषयों की पढ़ाई तक व्यवस्था सीमित रखना आज के दौर में पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन, मैनेजमेंट, फॉरेन लैंग्वेज और कंप्यूटर एप्लिकेशन जैसे रोजगारपरक एवं आधुनिक विषयों की पढ़ाई शुरू करने तथा इन विषयों में भी नियमित शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की। उनका कहना है कि बदलते समय के साथ उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम और शिक्षक नियुक्ति की व्यवस्था में भी बदलाव होना जरूरी है। आधुनिक विषयों में अवसर उपलब्ध नहीं कराने से बिहार के विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों की ओर रुख करना पड़ सकता है।
धरनारत अभ्यर्थियों की मांगों का किया समर्थन
डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने सहायक प्राध्यापक नियुक्ति को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगों का भी समर्थन किया। उन्होंने उम्र सीमा को 43 वर्ष से बढ़ाकर 55 वर्ष किए जाने की मांग को जायज बताया। साथ ही उन्होंने बिहार के अभ्यर्थियों के हित में डोमिसाइल नीति लागू किए जाने की मांग का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब राज्य में नेट, जेआरएफ और पीएचडी जैसी उच्च योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों की बड़ी संख्या मौजूद है, तो फिर मास्टर डिग्री आधारित बहाली परीक्षा आयोजित करने की आवश्यकता और उसके पीछे के उद्देश्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सरकार और राजभवन पर भी साधा निशाना
कांग्रेस प्रवक्ता ने राज्य सरकार और राजभवन की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उच्च शिक्षित अभ्यर्थियों की मौजूदगी के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया में ऐसे प्रावधान क्यों किए जा रहे हैं, जिनसे योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार और राजभवन के बीच मिलीभगत का आरोप लगाते हुए इस पूरी प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग की। डॉ. वर्धन ने कहा कि सहायक प्राध्यापक की बहाली प्रक्रिया को पूरी तरह राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 को अविलंब रद्द करने तथा अभ्यर्थियों के हित में नई और पारदर्शी नियुक्ति नियमावली तैयार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिहार के उच्च शिक्षित युवाओं को रोजगार और सम्मानजनक अवसर देना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि ऐसी नियुक्ति व्यवस्था लागू करना जिससे योग्य अभ्यर्थियों के बीच असंतोष पैदा हो।





