चौसा गंगा पंप नहर से लक्ष्मीपुर माइनर में नहीं पहुंचा पानी, धान की खेती पर मंडराया संकट
कांग्रेस ओबीसी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार मौर्य ने सरकार और विभागों पर किसानों की अनदेखी का लगाया आरोप, सिंचाई के लिए पानी और पर्याप्त बिजली आपूर्ति की तत्काल मांग


न्यूज विज़न। बक्सर
जिले के चौसा प्रखंड अंतर्गत गंगा पंप नहर से लक्ष्मीपुर माइनर में पानी की आपूर्ति बंद रहने से क्षेत्र के किसानों के सामने सिंचाई का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। धान रोपनी के महत्वपूर्ण समय में नहर सूखी रहने से सैकड़ों किसानों की खेती प्रभावित हो रही है। खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने के कारण किसान निजी संसाधनों और किस्मत के भरोसे फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मामले को लेकर कांग्रेस ओबीसी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष विनोद कुमार मौर्य ने सरकार और संबंधित विभागों पर किसानों की लगातार उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि गंगा पंप नहर से लक्ष्मीपुर माइनर में पानी नहीं आने के कारण किसानों को मजबूरी में निजी नलकूपों और डीजल पंपों के सहारे खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और छोटे एवं सीमांत किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
विनोद मौर्य ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सिंचाई के लिए आवश्यक समय तक कृषि फीडरों पर बिजली उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। कई किसानों ने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। शिकायत के बाद भी किसान लगातार पावर हाउस के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, बावजूद इसके उन्हें राहत नहीं मिल रही है।
उन्होंने कहा कि धान रोपनी का यह समय किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि समय पर खेतों में पानी नहीं पहुंचा और बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो धान की फसल को भारी नुकसान होगा, जिसका सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।
कांग्रेस नेता ने जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग और बिजली विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर गंगा पंप नहर से लक्ष्मीपुर माइनर में पानी की आपूर्ति बहाल करने तथा कृषि फीडरों पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और इसका व्यापक असर कृषि उत्पादन पर भी दिखाई देगा।





