बक्सर के छात्रों का कमाल: बनाया AI आधारित स्कूल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, शिक्षा व्यवस्था बदलने का दावा
वरुणा के आकाश मौर्य और सोवा के राहुल मौर्य ने तैयार किया 'TAB TECH'; उपस्थिति, फीस, परीक्षा, अभिभावक संवाद और स्कूल प्रबंधन एक ही प्लेटफॉर्म पर होगा संचालित


न्यूज़ विज़न। बक्सर
प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यदि जिज्ञासा, मेहनत और कुछ नया करने का जुनून हो तो छोटे से गांव का विद्यार्थी भी अपनी सोच और नवाचार से बड़ी पहचान बना सकता है। इसका जीवंत उदाहरण बक्सर जिले के सदर प्रखंड के वरुणा गांव निवासी 13 वर्षीय छात्र आकाश मौर्य और डुमरांव प्रखंड के सोवा गांव निवासी उसके रिश्ते के भाई राहुल मौर्य ने पेश किया है। आकाश सातवीं एवं राहुल मौर्य दसवीं कक्षा के छात्र हैं, लेकिन इतनी कम उम्र में इन्होंने शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से ‘TAB TECH’ नामक एक उन्नत स्कूल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर विकसित करने का दावा किया है।
आकाश, वरुणा गांव निवासी श्याम जी सिंह के पुत्र एवं स्वर्गीय रामजी सिंह के पौत्र हैं, जबकि राहुल, सोवा गांव निवासी लालबहादुर सिंह के पुत्र हैं। दोनों ने मिलकर ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो विद्यालयों के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों को एक ही मंच से संचालित करने में सक्षम बताया जा रहा है।
एक प्लेटफॉर्म पर स्कूल की पूरी व्यवस्था
छात्रों के अनुसार TAB TECH के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षा परिणाम, फीस प्रबंधन, अभिभावकों से संवाद, ऑनलाइन प्रवेश, विद्यालय प्रशासन सहित अनेक कार्य डिजिटल रूप से संचालित किए जा सकते हैं। उनका कहना है कि इस तकनीक का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है।
स्कूल में प्रवेश करते ही दर्ज होगी उपस्थिति
आकाश और राहुल ने बताया कि इस सॉफ्टवेयर में ऐसी तकनीक विकसित की गई है, जिसके माध्यम से विद्यालय परिसर में प्रवेश करते ही शिक्षकों की उपस्थिति स्वतः दर्ज हो जाएगी। इसके साथ ही पढ़ाई के दौरान शिक्षक का मोबाइल लॉक रहेगा, जिससे सोशल मीडिया का उपयोग नहीं हो सकेगा और कक्षा में पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। उनका दावा है कि इससे विद्यालयों में अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
अभिभावकों को मिलेगी हर जानकारी
इस प्लेटफॉर्म के जरिए अभिभावक अपने बच्चों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम, होमवर्क, ऑनलाइन नोट्स, विद्यालय की गतिविधियों और प्रवेश संबंधी जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा विद्यालय परित्याग प्रमाण-पत्र (TC), चरित्र प्रमाण-पत्र, मार्कशीट और प्रवेश-पत्र जैसी आवश्यक सेवाएं भी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
बारकोड स्कैन कर जमा होगी फीस
सॉफ्टवेयर में डिजिटल भुगतान की सुविधा भी जोड़ी गई है। अभिभावक बारकोड स्कैन कर घर बैठे फीस जमा कर सकेंगे और भुगतान की रसीद तत्काल प्राप्त होगी। छात्रों का दावा है कि इसमें एआई तकनीक का भी उपयोग किया गया है, जो फीस भुगतान में लगातार देरी करने वाले अभिभावकों की जानकारी विद्यालय प्रबंधन को उपलब्ध कराएगी। साथ ही विद्यालय प्रबंधन शिक्षकों के वेतन भुगतान की निगरानी भी आसानी से कर सकेगा।
पांच भाषाओं में उपलब्ध
छात्रों ने बताया कि फिलहाल यह सॉफ्टवेयर हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, बांग्ला और मराठी भाषा में उपलब्ध है। अभिभावक ऑनलाइन शिकायत और सुझाव भी दर्ज कर सकेंगे तथा बच्चों की शैक्षणिक प्रगति एवं विद्यालय की गतिविधियों की जानकारी समय-समय पर प्राप्त करते रहेंगे।
छह से अधिक निजी विद्यालयों में शुरू हुआ प्रयोग
आकाश और राहुल के अनुसार प्रयोग के तौर पर इस सॉफ्टवेयर को छह से अधिक निजी विद्यालयों में शुरू किया जा चुका है। वहां से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने की योजना बनाई जा रही है। दोनों का सपना देश के प्रत्येक विद्यालय को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और डिजिटल बन सके।
दो और साथी दे रहे हैं साथ
इस परियोजना को सफल बनाने में अंकित कुमार और अजीत कुमार भी आकाश और राहुल के साथ जुड़े हुए हैं। पूरी टीम लगातार सॉफ्टवेयर को बेहतर बनाने और उसमें नए फीचर जोड़ने में जुटी है। टीम का मानना है कि तकनीक के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
परिवार से मिल रही प्रेरणा
आकाश के छोटे भाई अंकु मौर्य भी कम उम्र में ही संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रहे हैं। एक ही परिवार के बच्चों का शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में बड़ा लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है।
बन रहे प्रेरणा के प्रतीक
ग्रामीण परिवेश से निकलकर तकनीक के क्षेत्र में इस तरह का नवाचार करने वाले आकाश और राहुल ने यह साबित करने का प्रयास किया है कि प्रतिभा अवसरों की मोहताज नहीं होती। यदि संकल्प मजबूत हो तो छोटी उम्र में भी बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह नवाचार भविष्य में शिक्षा व्यवस्था को किस हद तक नई दिशा दे पाता है।





