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Private Schools Association ने शिक्षा मंत्री के सामने रखीं समस्याएं, बोले मिथिलेश तिवारी – जल्द होगा समाधान, नियमावली में भी होंगे बदलाव

PSACWA के शिक्षा संवाद कार्यक्रम में जिलेभर के निजी विद्यालयों के प्रबंधक व प्राचार्य हुए शामिल, RTE भुगतान, नई शिक्षा नीति और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर उठी मांगें।

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
शहर के बस स्टैंड स्थित वैष्णवी होटल में गुरुवार को Private Schools and Children Welfare Association (PSACWA) के तत्वावधान में “शिक्षा संवाद कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। शाम 4 बजे से 6 बजे तक चले इस कार्यक्रम में बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। संवाद में जिले के निबंधित, गैर-निबंधित एवं संबद्धता प्राप्त निजी विद्यालयों के प्रबंधक, निदेशक एवं प्राचार्यों ने भाग लिया और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी।

 

निजी विद्यालयों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का उद्देश्य
PSACWA के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप पाठक ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य निजी विद्यालयों के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को सीधे सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर निजी स्कूलों के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाया गया, लेकिन विद्यालयों ने संयम और गरिमा बनाए रखी। उन्होंने कहा कि बिहार में आज भी साक्षरता दर लगभग 70 प्रतिशत है और राज्य सरकार अपनी जीडीपी का केवल चार प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करती है, जबकि यूनेस्को के अनुसार 100 प्रतिशत साक्षरता प्राप्त करने के लिए कम से कम छह प्रतिशत खर्च आवश्यक है। उन्होंने निजी क्षेत्र को अधिक स्वतंत्रता देने की मांग करते हुए कहा कि इससे बिहार शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन सकता है।

 

RTE भुगतान और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर उठी मांग
डॉ. प्रदीप पाठक ने शिक्षा मंत्री के समक्ष नई शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में पोर्टल एंट्री और तकनीकी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग रखी। उन्होंने कहा कि RTE के तहत निजी विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि समय पर मिले तो अधिक विद्यालय गरीब एवं वंचित बच्चों को प्रवेश देने के लिए आगे आएंगे। बिरला ओपन माइंड के निदेशक अंकुर राय ने RTE प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तर्कसंगत बनाने के लिए सुझाव प्रस्तुत किए।

 

“सबसे अधिक रोजगार निजी विद्यालय ही देते हैं”
PSACWA अध्यक्ष डॉ. प्रदीप पाठक एवं कैंब्रिज स्कूल के निदेशक डॉ. मोहन चौबे ने कहा कि बिहार में सबसे अधिक रोजगार निजी विद्यालयों के माध्यम से मिलता है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष नीट और आईआईटी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सबसे अधिक सफल छात्र निजी विद्यालयों से निकलकर बिहार का नाम रोशन करते हैं।

जिला प्रशासन के फैसलों में समन्वय की मांग
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि कई बार सरकार एवं जिला प्रशासन के निर्णय अचानक लागू हो जाते हैं, जिसकी जानकारी समय पर ग्रामीण क्षेत्रों तक नहीं पहुंच पाती। इससे अभिभावकों, विद्यार्थियों और विद्यालय कर्मियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि निजी विद्यालयों से जुड़े दिशा-निर्देशों में PSACWA की सलाहकारी भूमिका सुनिश्चित की जाए।

“सभी निजी विद्यालयों का एक मंच पर आना समय की मांग”
कार्यक्रम के संचालक एवं मिलेनियम स्कूल के निदेशक भारत प्रसाद ने सभी विद्यालय संचालकों से संगठन की बैठकों में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग के साथ बेहतर समन्वय से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

शिक्षा मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार निजी विद्यालयों की समस्याओं से पूरी तरह अवगत है और पटना स्तर पर शिक्षा विभाग के साथ इन मुद्दों के समाधान के लिए कार्य किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नियमावली में कुछ आंशिक बदलाव किए जाएंगे, जिससे निजी विद्यालयों और अभिभावकों दोनों को लाभ मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान PSACWA के सदस्यों ने शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को शॉल, बुके, पुस्तक एवं मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया।

 

ये रहे प्रमुख रूप से मौजूद
कार्यक्रम में बिहार सेंट्रल स्कूल के सचिव सरोज सिंह, डुमरांव कैम्ब्रिज के टी.एन. चौबे, बक्सर पब्लिक स्कूल के निर्मल सिंह, हेरिटेज स्कूल के सुदीप पाठक, सिल्वरबेल्स के संजीव ओझा, ट्रिनिटी कॉन्वेंट के धीरज पांडेय, रेडिएंट स्कूल के जयप्रकाश सिंह, पाथवेज के आर. राघवन सहित जिले के लगभग सभी निजी विद्यालयों के निदेशक एवं प्राचार्य उपस्थित रहे।

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