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बक्सर नगर परिषद की 17 लाख की पोखरा योजना पर उठे सवाल, कागजों में पूरा काम, जमीन पर अधूरी खुदाई

वार्ड 22 के सिंगरही पोखरा की खुदाई और पानी निकासी योजना में अनियमितता के आरोप, शिलापट्ट और विभागीय रिकॉर्ड में खर्च अलग-अलग, स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग

आशुतोष सिंह की रिपोर्ट 

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बक्सर नगर परिषद की विकास योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 22 स्थित सिंगरही पोखरा की खुदाई एवं पानी निकासी योजना में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। विभागीय अभिलेखों में योजना को पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि स्थल की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

 

 

एक माह में पूरा होना था कार्य
जानकारी के अनुसार, सिंगरही पोखरा की मिट्टी खुदाई एवं पानी निकासी के लिए तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा 12 जनवरी 2026 को संवेदक संतोष कुमार केशरी के नाम कार्यादेश जारी किया गया था। मिट्टी खुदाई योजना की प्राक्कलित राशि 9 लाख 1 हजार 70 रुपये तय की गई थी। वहीं कार्यस्थल पर लगे शिलापट्ट में पोखरे से पानी निकासी कार्य पर 8 लाख 11 हजार 111 रुपये खर्च होने का उल्लेख है। इस प्रकार दोनों कार्यों को मिलाकर करीब 17 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च होने का दावा किया गया है। विभागीय आदेश के अनुसार यह कार्य एक माह के भीतर पूरा किया जाना था।

 

मार्च में पूर्ण दिखा दी गई योजना, लेकिन स्थल पर अधूरा काम
नगर परिषद के रिकॉर्ड में इस योजना को मार्च 2026 में पूर्ण दर्शाया गया है, लेकिन मौके पर स्थिति इससे मेल नहीं खाती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पोखरे में केवल दो स्थानों पर हल्की खुदाई कर औपचारिकता पूरी कर दी गई। उनका कहना है कि आज भी पोखरे की गहराई आसपास के क्षेत्र से महज एक से डेढ़ फीट अधिक है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 17 लाख रुपये से अधिक की राशि आखिर किस कार्य पर खर्च की गई।

अधिकारियों ने नहीं दी स्पष्ट जानकारी
योजना की निगरानी से जुड़े जूनियर इंजीनियर भूलन यादव ने इस संबंध में जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि विभाग ही इस विषय पर जानकारी देगा। वहीं सहायक अभियंता वंदना कुमारी ने भी किसी प्रकार की टिप्पणी करने से मना कर दिया। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक ने बताया कि यह कार्य उनके पूर्ववर्ती अधिकारी के कार्यकाल में कराया गया था तथा विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार मार्च 2026 में ही पूरा हो चुका है। हालांकि कार्य की वास्तविक स्थिति और निष्पादन से जुड़े सवालों पर उन्होंने संबंधित इंजीनियरों से जानकारी लेने की बात कही।

दस्तावेज और जमीनी हकीकत में दिख रहा अंतर
नगर परिषद से प्राप्त दस्तावेजों और कार्यस्थल पर लगे शिलापट्ट में दर्ज जानकारी कई सवाल खड़े कर रही है। एक ओर फाइलों में योजना पूरी दिखाई गई है, जबकि दूसरी ओर स्थल पर अधूरा कार्य नजर आ रहा है। निर्धारित समय सीमा बीतने के कई महीने बाद भी योजना का पूरा स्वरूप दिखाई नहीं देने से जांच की मांग और तेज हो गई है।

स्थानीय लोगों ने लगाए मिलीभगत के आरोप
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर नगर परिषद के कर्मचारियों और संवेदक की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर परिषद की कई योजनाओं में गुणवत्ता की अनदेखी और कागजी खानापूर्ति की प्रवृत्ति देखने को मिल रही है।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में नाराजगी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, योजना की तकनीकी जांच करवाने तथा यदि अनियमितता सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और संवेदक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

(नोट: समाचार में लगाए गए आरोप स्थानीय लोगों के दावों और उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं। संबंधित पक्षों के आधिकारिक स्पष्टीकरण या जांच रिपोर्ट आने पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।)

 

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