गोवा बीच नहीं, मौत का कुआं बनता जा रहा ठोरा गंगा संगम: तीन दिन में दो युवकों की डूबकर मौत, प्रशासन और समाज दोनों के लिए बड़ा अलार्म
सोशल मीडिया की वायरल लोकेशन बन रही जानलेवा, रील और मस्ती के चक्कर में बुझ रही घरों की खुशियां


न्यूज़ विज़न। बक्सर
शहर के ठोरा गंगा संगम के समीप बना रेत का प्राकृतिक दृश्य इन दिनों सोशल मीडिया पर “गोवा बीच” के नाम से तेजी से वायरल हो रहा है। लेकिन यह खूबसूरत दिखने वाला इलाका अब धीरे-धीरे युवाओं के लिए “मौत का कुंआ” साबित होता जा रहा है। पिछले तीन दिनों के भीतर यहां दो युवकों की डूबकर मौत हो चुकी है। लगातार हो रही घटनाओं ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।
हर दिन सुबह से शाम तक यहां जिलेभर से बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। कोई परिवार के साथ पिकनिक मनाने आ रहा है, तो कहीं युवाओं की टोली रील और फोटोशूट बनाने में जुटी दिख रही है। शाम ढलते ही माहौल और भी भीड़भाड़ वाला हो जाता है। लेकिन इस मस्ती और सोशल मीडिया की चमक के पीछे गंगा की गहराई कब किसी की जिंदगी निगल ले, इसका अंदाजा किसी को नहीं होता।
सोमवार को फिर गई एक युवक की जान
ताजा घटना सोमवार 11 मई की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार राजपुर थाना क्षेत्र के हेठुआ गांव निवासी सुरेंद्र कुमार के 18 वर्षीय पुत्र अनूप कुमार की गंगा में डूबने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि अनूप बक्सर में रहकर पढ़ाई करता था और दोस्तों के साथ घूमने एवं मस्ती करने ठोरा गंगा संगम पहुंचा था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। युवक की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया है।
शनिवार को भी गई थी किशोर की जान
इससे पहले शनिवार को नगर थाना क्षेत्र के कोइरपुरवा निवासी एक किशोर की भी इसी जगह डूबने से मौत हो गई थी। लगातार दूसरी घटना ने यह साफ कर दिया है कि यह इलाका अब बेहद खतरनाक बन चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा के इस हिस्से में कई जगह अचानक गहराई है। ऊपर से शांत और सामान्य दिखने वाला पानी अंदर से बेहद खतरनाक है। रेत धंसने और तेज बहाव के कारण कई लोग संभल नहीं पाते।
रील और रोमांच के चक्कर में खतरे को भूल रहे युवा
इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और तस्वीरों के कारण बड़ी संख्या में युवा यहां पहुंच रहे हैं। कई युवक-युवतियां गंगा किनारे रील बनाने, फोटोशूट करने और पानी में उतरकर वीडियो रिकॉर्ड करने में लगे रहते हैं। लेकिन थोड़ी सी लापरवाही सीधे मौत में बदल रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। न तो चेतावनी बोर्ड लगे हैं और न ही किसी तरह की निगरानी की मजबूत व्यवस्था दिखती है।
शहरवासियों से अपील — “मस्ती नहीं, जिंदगी जरूरी है”
यह खबर केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। अभिभावकों को अपने बच्चों पर नजर रखने की जरूरत है। युवाओं को समझना होगा कि सोशल मीडिया की एक रील या कुछ मिनट का रोमांच उनकी पूरी जिंदगी छीन सकता है। यदि किसी को तैरना नहीं आता है तो गंगा में बिल्कुल न उतरें। परिवार के साथ भी वहां जाने से बचें। विशेषकर शाम के समय बच्चों और युवाओं को अकेले वहां नहीं जाने दें।
प्रशासन से भी उठ रही कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ठोरा गंगा संगम क्षेत्र में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, खतरनाक स्थानों को चिन्हित किया जाए तथा पुलिस और गोताखोरों की निगरानी बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।
दो घरों की खुशियां तीन दिनों में उजड़ चुकी हैं। अब जरूरत है कि लोग समय रहते संभल जाएं, वरना यह “गोवा बीच” और कितनी जिंदगियां निगलेगा, कहना मुश्किल है।
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