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अरक गांव में सरकारी रास्ते पर अतिक्रमण से बढ़ा तनाव

अंचलाधिकारी एवं पुलिस प्रशासन के स्पष्ट निर्देश के बावजूद लगातार तीसरे दिन भी अवैध निर्माण कार्य जारी, प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
चक्की अंचल अंतर्गत अरक गांव में सरकारी रास्ते पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। विकास के दावों के बीच ग्रामीण आज अपने बुनियादी अधिकार—आवागमन—के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। एक सप्ताह पूर्व स्थानीय निवासी रामनिवास पांडेय द्वारा अंचलाधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके बाद प्रशासनिक पहल के तहत गुरुवार को अंचलाधिकारी के निर्देश पर अमीन उमेश पासवान द्वारा स्थल की पैमाइश की गई।

 

जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि संबंधित व्यक्ति द्वारा निजी भूमि के साथ-साथ सरकारी जमीन (रास्ता) पर भी शौचालय टंकी का निर्माण कराया जा रहा है। अमीन ने तत्काल निर्माण कार्य रोकने का निर्देश देते हुए संबंधित पक्ष से भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन वह ऐसा करने में असफल रहा। गंभीर बात यह है कि अंचलाधिकारी एवं पुलिस प्रशासन के स्पष्ट निर्देश के बावजूद लगातार तीसरे दिन भी अवैध निर्माण कार्य जारी रहा, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

ग्रामीणों की बढ़ती परेशानी, सामाजिक तनाव का खतरा

सरकारी रास्ता बाधित होने से गांव के पूर्वी टोले के लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। आवागमन के लिए ग्रामीणों को निजी खेतों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खड़ी फसलों को नुकसान हो रहा है। इस स्थिति ने ग्रामीणों के बीच आपसी विवाद, गाली-गलौज एवं मारपीट की घटनाओं को जन्म दिया है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है। उक्त मार्ग खेसरा संख्या 2196, 2194, 2193, 1981, 1980, 1983 एवं 1995 से होकर गुजरता है, जो वर्तमान में पूर्णतः अवरुद्ध है।

 

ग्रामीणों का सामूहिक आक्रोश

लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को दिए गए सामूहिक आवेदन में ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इस मांग का समर्थन करने वालों में प्रमुख रूप से रामनिवास पांडेय, रामायण सिंह, बनारसी गोंड, गंगाधर सिंह, तारकेश्वर सिंह, राम बाबू सिंह, रामजी वर्मा, सोनू गोंड, रवींद्र सिंह, परशुराम सिंह, अनिल सिंह एवं बिजेंद्र सिंह शामिल हैं।

 

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

ग्रामीणों ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब बार-बार निर्देश के बावजूद अतिक्रमणकारी निर्माण कार्य जारी रखे हुए हैं, तो उनके खिलाफ FIR या अन्य ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। अब यह प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है कि वह समय रहते हस्तक्षेप कर बिना किसी तनाव या हिंसा के सरकारी रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराए और आम जनजीवन को सुचारू बनाए।

 

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