तीन महीने बाद बक्सर पूर्वी रेलवे गुमटी खोलने की प्रक्रिया शुरू, जनता के आंदोलन और जनप्रतिनिधियों की पहल का दिखा असर
30 मई को बंद हुई थी पूर्वी रेलवे गुमटी, 4 जून को क्षतिग्रस्त हुआ था रेलवे ओवरब्रिज का संपर्क पथ; मरम्मत नहीं होने से बढ़ी परेशानी, धरना-प्रदर्शन और हाईकोर्ट की याचिका के बाद रेलवे प्रशासन ने गुमटी खोलने का आदेश किया पारित


न्यूज़ विज़न। बक्सर
जिले की जनता की लंबे समय से चली आ रही परेशानी और लगातार जारी आंदोलन के बीच बक्सर पूर्वी रेलवे गुमटी को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। करीब तीन महीने बाद रेलवे प्रशासन की ओर से गुमटी खोलने की दिशा में आदेश पारित किया गया है। इससे शहरवासियों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में राहत की उम्मीद जगी है।
दरअसल, बक्सर में नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज के चालू होने के बाद 30 मई को पूर्वी रेलवे गुमटी को रेल प्रशासन ने बंद कर दिया था। गुमटी बंद होने के बाद वाहनों की आवाजाही पूरी तरह नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज के रास्ते शुरू कर दी गई। लोगों को उम्मीद थी कि अब आवागमन सुगम होगा, लेकिन पुल के पूरी तरह चालू होने के महज चार दिन बाद ही 4 जून को बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा निर्मित संपर्क पथ के हिस्से में खंभा संख्या 14 और 15 के समीप पुल क्षतिग्रस्त हो गया। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद संबंधित संवेदक के खिलाफ कार्रवाई भी की गई, लेकिन करीब तीन महीने बीत जाने के बावजूद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत नहीं हो सकी। इसके चलते लोगों के सामने आवागमन की गंभीर समस्या बनी रही। गुमटी बंद होने और पुल के क्षतिग्रस्त रहने से शहर के एक बड़े हिस्से के लोगों को लंबी दूरी तय कर आवागमन करना पड़ रहा था।
सदन में सांसद ने उठाया मामला
पूर्वी रेलवे गुमटी को दोबारा खोलने की मांग को लेकर बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने संसद में भी मामला उठाया। इसके बाद रेल मंत्री की ओर से स्पष्ट किया गया कि क्षतिग्रस्त पुल का संबंधित हिस्सा बिहार सरकार के अधीन आता है। हालांकि, गुमटी को दोबारा खोलने के सवाल पर उस समय कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। वहीं बक्सर सदर विधायक आनंद मिश्रा ने भी विधानसभा के सत्र में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने रेलवे के डीआरएम से पत्राचार करने के साथ ही रेल मंत्री से मुलाकात कर पूर्वी रेलवे गुमटी को आम लोगों के लिए खोलने की मांग रखी।
12 जुलाई से शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना
गुमटी खोलने की मांग को लेकर दलित अति पिछड़ा स्वाभिमान संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में आंदोलन तेज हुआ। मोर्चा की ओर से 12 जुलाई से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया। आंदोलनकारियों ने गुमटी को आम जनता के लिए फिर से खोलने की मांग को लेकर लगातार आवाज बुलंद की। इसके बाद 18 जुलाई को रेल चक्का जाम करने का आह्वान किया गया। आंदोलन को देखते हुए रेल प्रशासन और जिला प्रशासन ने आंदोलनकारियों के साथ वार्ता की और 18 जुलाई को धरना 10 दिनों के लिए स्थगित कराया गया। हालांकि, निर्धारित अवधि के बाद भी पूर्वी रेलवे गुमटी नहीं खोली गई।
30 जुलाई से फिर शुरू हुआ आंदोलन
गुमटी नहीं खुलने के बाद आंदोलनकारियों ने 30 जुलाई से दोबारा धरना शुरू कर दिया। इसके बाद विभिन्न संगठनों के सहयोग से 8 अगस्त को रेल चक्का जाम किया गया। रेल चक्का जाम के मामले में दर्जनों लोगों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई। एफआईआर के बाद आंदोलनकारियों ने न्यायिक लड़ाई का रास्ता अपनाया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सरोज राजभर की ओर से पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन, रेल मंत्री, रेलवे के जीएम, डीआरएम, बिहार सरकार के प्रधान सचिव समेत कुल 11 लोगों को पक्षकार बनाया गया।
आंदोलन से लेकर न्यायालय तक पहुंचा मामला
पूर्वी रेलवे गुमटी को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब सड़क से लेकर सदन और न्यायालय तक पहुंच चुका था। लगातार धरना-प्रदर्शन, रेल चक्का जाम, जनप्रतिनिधियों की पहल और हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर होने के बाद अब रेलवे प्रशासन की ओर से गुमटी खोलने का आदेश पारित किया गया है। रेलवे प्रशासन के इस निर्णय के बाद बक्सर की जनता में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि पूर्वी रेलवे गुमटी जल्द ही आम लोगों के आवागमन के लिए खोल दी जाएगी। हालांकि, गुमटी खोलने की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी और आम लोगों के लिए वास्तविक रूप से आवागमन कब शुरू होगा, इस पर अंतिम स्थिति प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि क्षतिग्रस्त रेलवे ओवरब्रिज की मरम्मत में अभी और समय लगता है तो पूर्वी रेलवे गुमटी को खोलना शहर की यातायात व्यवस्था और आम जनता की सुविधा के लिए बेहद जरूरी है। लोगों को उम्मीद है कि रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन अब इस दिशा में तेजी से कार्रवाई करेंगे, ताकि लंबे समय से चली आ रही परेशानी का स्थायी समाधान हो सके।





