CRIME

POCSO केस में आईओ की बड़ी लापरवाही पर अदालत सख्त, वेतन से कटेंगे ₹5 हजार; विभागीय कार्रवाई के भी आदेश

करीब 2 वर्ष 10 माह तक चार्जशीट दबाए रखने पर कोर्ट नाराज़, न्यायिक प्रक्रिया में हुई देरी पर जताई कड़ी आपत्ति; एसपी से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
जिला अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो-6) अमित कुमार शर्मा की अदालत ने औद्योगिक थाना कांड संख्या 153/2021 की सुनवाई के दौरान अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) की गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने अनुसंधान पदाधिकारी अभय कुमार सिंह के वेतन से 5 हजार रुपये की अनुकरणीय लागत वसूलने का निर्देश दिया है। साथ ही उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है।

 

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले की चार्जशीट 28 अगस्त 2023 को तैयार हो चुकी थी, लेकिन इसे 19 जून 2026 को न्यायालय में दाखिल किया गया। यानी लगभग दो वर्ष 10 माह तक चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई। सबसे गंभीर बात यह रही कि इस असाधारण देरी का कोई संतोषजनक कारण भी अनुसंधान पदाधिकारी द्वारा नहीं बताया गया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अनुसंधान पदाधिकारी की इस लापरवाही के कारण मुकदमे की सुनवाई लगभग तीन वर्षों तक आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई और पीड़ित पक्ष को समय पर न्याय मिलने में अनावश्यक विलंब हुआ। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मामले में कई बार अनुसंधान की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई, लेकिन समय पर कोई रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई। अंततः न्यायालय को थाना प्रभारी की व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश देना पड़ा, जिसके बाद चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई।

 

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी पाया कि पीड़िता की मूल मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बजाय केवल उसकी फोटोकॉपी न्यायालय में दी गई। मूल रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराने का कोई कारण भी अनुसंधान पदाधिकारी द्वारा नहीं बताया गया। अदालत ने इसे अनुसंधान में गंभीर लापरवाही तथा न्यायिक आदेशों की अवहेलना माना। इन परिस्थितियों को देखते हुए विशेष न्यायाधीश ने दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत 5 हजार रुपये की अनुकरणीय लागत अभियोजन पर लगाते हुए आदेश दिया कि यह राशि अनुसंधान पदाधिकारी अभय कुमार सिंह के वेतन से काटकर 15 दिनों के भीतर सिविल कोर्ट के नजारत में जमा कराई जाए। साथ ही अदालत ने पुलिस अधीक्षक को आदेश के अनुपालन का निर्देश देते हुए संबंधित कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने का भी आदेश दिया है। अदालत का यह आदेश न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब और अनुसंधान में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के प्रति कड़ा संदेश माना जा रहा है।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button