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जी.डी. मिश्रा इंस्टीट्यूट में टीएलएम एवं शिक्षण मॉडल प्रदर्शनी का आयोजन, प्रशिक्षुओं ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा

डी.एल.एड. एवं बी.एड. द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षुओं ने विभिन्न विषयों पर तैयार किए आकर्षक मॉडल, अतिथियों ने नवाचार और व्यावहारिक शिक्षण कौशल की सराहना की

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
जी. डी. मिश्रा इंस्टीट्यूट ऑफ हायर स्टडीज, बक्सर में डी.एल.एड. एवं बी.एड. द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षुओं द्वारा सहायक शिक्षण सामग्री (टीएलएम) एवं शिक्षण मॉडल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में प्रशिक्षुओं ने उत्साह, लगन और रचनात्मकता का परिचय देते हुए विभिन्न विषयों से संबंधित आकर्षक शिक्षण सामग्रियों एवं उपयोगी मॉडलों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में प्रशिक्षुओं की प्रतिभा, नवाचार और व्यावहारिक सोच की झलक देखने को मिली।

 

इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य भावी शिक्षकों में नवाचार, सृजनात्मकता, व्यावहारिक शिक्षण कौशल तथा प्रभावी शिक्षण पद्धतियों के प्रति रुचि विकसित करना था। प्रशिक्षुओं ने अपनी कल्पनाशीलता और विषयगत समझ के आधार पर ऐसे मॉडल एवं शिक्षण उपकरण तैयार किए, जिनके माध्यम से जटिल विषयों को भी सरल, रोचक और सहज तरीके से विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया जा सकता है। विशेष बात यह रही कि कई मॉडलों में स्थानीय एवं सामान्य रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाने का प्रयास किया गया।

 

प्रदर्शनी का अवलोकन संस्थान के निदेशक प्रदीप मिश्र, प्रख्यात शिक्षाविद् अनादि किशोर प्रणामी, मनोज त्रिगुण एवं संस्थान के प्राचार्य डॉ. जे. आर. चौधरी सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने किया। अतिथियों ने एक-एक कर प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार किए गए मॉडलों एवं शिक्षण सामग्रियों का निरीक्षण किया तथा उनके निर्माण की प्रक्रिया और उपयोगिता के बारे में जानकारी ली। उन्होंने प्रशिक्षुओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां भावी शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि शिक्षण सामग्री का प्रभावी उपयोग विद्यार्थियों की जिज्ञासा, विषयों के प्रति समझ और कक्षा में सक्रिय सहभागिता बढ़ाने में सहायक होता है। केवल पुस्तकीय ज्ञान से शिक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह प्रभावी नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए व्यावहारिक अनुभव, रचनात्मक दृष्टिकोण और आधुनिक शिक्षण तकनीकों का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां प्रशिक्षुओं को सैद्धांतिक ज्ञान को व्यवहार में उतारने का अवसर देती हैं। इससे उनमें कुशल, नवाचारी और संवेदनशील शिक्षक बनने की क्षमता विकसित होती है।

कार्यक्रम में डी.एल.एड. एवं बी.एड. द्वितीय वर्ष के प्रशिक्षुओं की सक्रिय सहभागिता, अनुशासन और रचनात्मक अभिव्यक्ति सराहनीय रही। प्रदर्शनी के माध्यम से संस्थान ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा, नवाचार और कौशल विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।

 

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