OTHERS

अरवल में सिविल सर्जन से मारपीट के विरोध में बक्सर में स्वास्थ्य सेवाएं ठप, डॉक्टरों ने किया ओपीडी का बहिष्कार

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद, इमरजेंसी सेवाएं रहीं जारी; इलाज के बिना लौटे सैकड़ों मरीज

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई कथित हिंसात्मक घटना और अमर्यादित व्यवहार के विरोध में बुधवार, 22 जुलाई 2026 को बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के राज्यव्यापी आह्वान पर बक्सर जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। जिला सचिव बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ बक्सर डॉ. संजय कुमार के नेतृत्व में सदर अस्पताल सहित जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया। इस कारण सामान्य इलाज के लिए पहुंचे सैकड़ों मरीजों को बिना चिकित्सा परामर्श के ही वापस लौटना पड़ा।

 

सुबह से ही सदर अस्पताल बक्सर के ओपीडी परिसर में सामान्य दिनों की तुलना में अलग स्थिति देखने को मिली। रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद रहे और चिकित्सक ओपीडी कक्षों में नहीं बैठे। इलाज कराने पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल पहुंचने के बाद हड़ताल की जानकारी मिली, जिससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन ओपीडी शुरू नहीं होने पर निराश होकर घर लौट गए।

 

राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा बना बक्सर
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के निर्णय के अनुसार राज्यभर के सभी सरकारी चिकित्सकों ने 22 जुलाई को ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया। हालांकि संघ ने स्पष्ट किया कि मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए इमरजेंसी, दुर्घटना, प्रसव तथा अन्य जीवनरक्षक सेवाएं पूर्ववत संचालित होती रहीं। गंभीर मरीजों का इलाज सामान्य रूप से किया गया ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को कठिनाई न हो।

अरवल की घटना से डॉक्टरों में रोष
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि आंदोलन का मुख्य कारण अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट की घटना है। उनका आरोप है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई। इससे पूरे राज्य के सरकारी चिकित्सकों में असुरक्षा की भावना व्याप्त है। संघ का कहना है कि चिकित्सकों पर बढ़ते हमलों को रोकने और अस्पतालों में सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार से कई बार मांग की गई, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी के विरोध में राज्यव्यापी ओपीडी बहिष्कार का निर्णय लिया गया।

दूर-दराज से आए मरीज सबसे अधिक हुए परेशान
ओपीडी बंद रहने का सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों पर पड़ा। कई मरीज सुबह-सुबह अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन पंजीकरण नहीं होने के कारण उन्हें बिना इलाज वापस लौटना पड़ा। कुछ मरीजों ने मजबूरी में निजी क्लीनिकों का रुख किया, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ा।

सरकार से सुरक्षा की मांग
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने सरकार से मांग की है कि अरवल घटना के दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी और स्थायी व्यवस्था लागू की जाए। संघ का कहना है कि जब तक चिकित्सकों की सुरक्षा की लिखित गारंटी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।

 

इमरजेंसी सेवाएं रहीं सामान्य 
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि ओपीडी सेवाएं भले ही बाधित रहीं, लेकिन इमरजेंसी वार्ड, प्रसव कक्ष और अन्य जीवनरक्षक सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं। गंभीर मरीजों के उपचार में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी गई।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button