संस्कृत विद्यालयों की प्रस्वीकृति को लेकर गंभीर हुई राज्य सरकार, शिक्षकों को जल्द राहत देने की मांग
3776 एवं 711 कोटि के जांच में खरे उतरे संस्कृत विद्यालयों को कोड और वित्त सहित प्रस्वीकृति देने की उठी मांग, वेतन के अभाव में शिक्षक-कर्मचारी भुखमरी के कगार पर

न्यूज़ विज़न। बक्सर
बिहार में संस्कृत शिक्षा व्यवस्था और संस्कृत विद्यालयों की प्रस्वीकृति का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बिहार प्रदेश संस्कृत शिक्षक महासंघ के पूर्व प्रेस सचिव मुखदेव राय एवं साधु शरण संस्कृत प्राथमिक सह उच्च विद्यालय, दीवान के बड़कागांव के सचिव त्रिलोकी नाथ सिंह ने संयुक्त बयान जारी कर राज्य सरकार से इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक पहल करने की मांग की है।
दोनों नेताओं ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि राज्य सरकार 3776 एवं 711 कोटि के संस्कृत विद्यालयों की प्रस्वीकृति के मामले को लेकर गंभीर है। ऐसे में सरकार को इस प्रक्रिया में तेजी लाते हुए संबंधित विद्यालयों के भविष्य को लेकर जल्द निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन दोनों कोटियों के अंतर्गत कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वेतन एवं अन्य सुविधाओं के अभाव में उनकी स्थिति लगातार दयनीय होती जा रही है और कई शिक्षक-कर्मचारी भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।
मुखदेव राय और त्रिलोकी नाथ सिंह ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों में वर्षों से शिक्षक एवं कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद प्रस्वीकृति से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इससे न केवल शिक्षकों और कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि संस्कृत शिक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
दोनों नेताओं ने राज्य सरकार से मांग की कि 3776 एवं 711 कोटि के अंतर्गत जांच में खरे उतरे विद्यालयों को विद्यालय कोड आवंटित करते हुए वित्त सहित प्रस्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि वहां कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को राहत मिल सके। उन्होंने सरकार से इस मामले में शीघ्र ठोस निर्णय लेने की अपील की।




