अगले तीन दिनों में बारिश के आसार, किसानों के लिए कृषि विज्ञान केंद्र ने जारी की विशेष सलाह
30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक बारिश का अनुमान, धान की फसल में गंधी व भूरा तना मधुआ कीट से बचाव और सब्जी फसलों की सुरक्षा को लेकर किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र ने दी जरूरी सलाह

न्यूज़ विज़न। बक्सर
कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर की ओर से 29 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में जिले में अगले तीन दिनों के मौसम को लेकर पूर्वानुमान जारी किया गया है। केंद्र के वर्षामापी के अनुसार आज करीब 10 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। वहीं आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई गई है। कृषि विज्ञान केंद्र ने मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों को फसलों की निगरानी करने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।
जारी पूर्वानुमान के अनुसार 30 अक्टूबर को 25 मिलीमीटर, 31 अक्टूबर को 25 मिलीमीटर तथा 1 नवंबर को 18 मिलीमीटर बारिश होने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान करीब 20 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। हवा की गति 30 अक्टूबर को करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटा, 31 अक्टूबर को 25 किलोमीटर प्रति घंटा तथा 1 नवंबर को 15 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का पूर्वानुमान है।
धान की फसल में गंधी कीट पर रखें नजर
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि धान की जो फसल दुग्धावस्था में पहुंच गई है, उसमें गंधी कीट की नियमित निगरानी करें। इसके नियंत्रण के लिए कार्बरिल 10 प्रतिशत या मैलाथियान 10 प्रतिशत धूल का प्रति हेक्टेयर 10 से 15 किलोग्राम की दर से प्रयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं धान की फसल में भूरा तना मधुआ कीट (BPH) को प्रमुख शत्रु कीट बताते हुए इसके नियंत्रण की भी सलाह दी गई है। इसके लिए इमिडाक्लोप्रिड को 1 मिलीलीटर प्रति 3 लीटर पानी की दर से अथवा इमिडाक्लोप्रिड 75 प्रतिशत WP को 1.25 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
सब्जी फसलों को लेकर भी सावधानी
केंद्र ने सब्जी की फसलों में भी किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। किसानों से कहा गया है कि साफ मौसम रहने पर ही सब्जी की फसलों में आवश्यक निराई-गुड़ाई एवं कृषि कार्य करें। साथ ही सब्जियों की बुआई के दौरान उचित दूरी का ध्यान रखने और बुआई से पहले बीज को कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करने की सलाह दी गई है। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि बारिश की संभावना को देखते हुए खेतों में जल निकासी की व्यवस्था पर भी ध्यान दें और मौसम के अनुसार ही फसलों में कीटनाशी एवं अन्य कृषि कार्य करें।




