27 अक्टूबर को हाईकोर्ट में होगी बक्सर रेलवे ओवरब्रिज मामले की अगली सुनवाई, मरम्मत और तकनीकी जांच पर 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश
बक्सर पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग खुलने के बाद भी ROB की सुरक्षा का मामला बरकरार, प्रतिवादी 1 से 7 को काउंटर एफिडेविट और याचिकाकर्ता को री-ज्वाइंडर दाखिल करने का मिला समय


न्यूज़ विज़न। बक्सर
बक्सर के पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग L.C. No. 70-B को आम लोगों के लिए पुनः खोलने तथा नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज की सुरक्षा, क्षतिग्रस्त पिलर की मरम्मत और तकनीकी जांच को लेकर सरोज कुमार राजभर उर्फ सरोज राजभर द्वारा चलाया जा रहा संघर्ष अब पटना हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले में न्यायालय के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। जिस रेलवे क्रॉसिंग को आम लोगों के लिए दोबारा खोलने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी, उसे अब आम जनता के उपयोग के लिए खोल दिया गया है। हालांकि, रेलवे ओवरब्रिज की सुरक्षा और मरम्मत से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न अभी न्यायालय के विचाराधीन हैं।
सरोज राजभर की ओर से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत C.W.J.C. No. 13634 of 2026 दायर की गई थी। याचिका में बक्सर पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग को आम जनता के लिए पुनः खोलने, रेलवे ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त अथवा धंसे हुए पिलर की समयबद्ध तरीके से मरम्मत कराने तथा ओवरब्रिज की तकनीकी स्थिति की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई थी।
पिलर धंसने के बाद बंद कर दिया गया था रेलवे क्रॉसिंग
याचिका में कहा गया कि रेलवे ओवरब्रिज के एक पिलर के धंसने के बाद पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग को बंद कर दिया गया था। इसके कारण बक्सर नगर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। आम लोगों की इस समस्या को लेकर सरोज राजभर की ओर से संबंधित अधिकारियों के समक्ष 2 जुलाई 2026 और 11 जुलाई 2026 को अभ्यावेदन दिए गए थे। वहीं, अधिकारियों की ओर से भी 2 जुलाई और 9 जुलाई 2026 को आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित स्तर पर अनुरोध किए जाने का उल्लेख याचिका में किया गया है। इसके बावजूद समस्या का अपेक्षित समाधान नहीं होने पर मामला पटना हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचा।
15 सितंबर को हुई सुनवाई में कोर्ट ने दर्ज की महत्वपूर्ण स्थिति
मामले की सुनवाई 15 सितंबर 2026 को माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव एवं माननीय न्यायमूर्ति सुधीर सिंह की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दर्ज किया कि याचिका में मांगी गई राहत के एक हिस्से के संबंध में परिस्थितियां बदल चुकी हैं और बक्सर पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग को आम जनता के उपयोग के लिए खोल दिया गया है। इस प्रकार, जिस क्रॉसिंग को पुनः खोलने की मांग को लेकर सरोज राजभर ने न्यायालय का रुख किया था, वह अब आम लोगों के लिए खोल दी गई है। इससे इस मार्ग से आवागमन करने वाले लोगों को राहत मिली है।
ROB की सुरक्षा और तकनीकी जांच का मुद्दा अभी बाकी
हालांकि, न्यायालय में मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। रेलवे ओवरब्रिज के धंसे हुए पिलर की मरम्मत, ओवरब्रिज की स्थिति की विशेषज्ञ अथवा तकनीकी जांच तथा मरम्मत के लिए समय-सीमा निर्धारित करने से संबंधित प्रार्थनाएं अभी विचाराधीन हैं। न्यायालय ने प्रतिवादी संख्या 1 से 7 को चार सप्ताह के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर री-ज्वाइंडर दाखिल करने का अवसर दिया गया है। मामले को आगे की सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।
“यह किसी व्यक्ति की नहीं, बक्सर के आम लोगों की लड़ाई है”—सरोज राजभर
मामले को लेकर सरोज राजभर ने कहा कि पूर्वी रेलवे क्रॉसिंग का मुद्दा केवल किसी रास्ते को खोलने या बंद करने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह बक्सर के आम नागरिकों के सुगम, सुरक्षित और सम्मानजनक आवागमन से जुड़ा विषय था। उन्होंने कहा कि पहले संबंधित अधिकारियों के समक्ष समस्या को उठाया गया और जब अपेक्षित समाधान नहीं हुआ, तब संवैधानिक न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। रेलवे क्रॉसिंग का पुनः खुलना इस प्रयास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन रेलवे ओवरब्रिज की तकनीकी सुरक्षा, धंसे हुए पिलर की मरम्मत और इससे जुड़े अन्य प्रश्नों का समाधान अभी जरूरी है। सरोज राजभर ने कहा, “यह संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि बक्सर के लोगों की सुविधा, सुरक्षा और उनके अधिकार के लिए है। रेलवे क्रॉसिंग खुल गई है, यह संतोष की बात है, लेकिन ओवरब्रिज की सुरक्षा और उसकी मरम्मत से जुड़े प्रश्नों का समाधान भी आवश्यक है। न्यायालय के समक्ष शेष मुद्दों पर हमारा प्रयास जारी रहेगा।” अब सभी की नजरें 27 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां रेलवे ओवरब्रिज की तकनीकी स्थिति, धंसे हुए पिलर की मरम्मत और समयबद्ध कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया सामने आएगी।





