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बाढ़ पूर्व कटाव निरोधक कार्य में अनियमितता का आरोप, मुख्य सचिव से जांच की मांग

शिकायत के बावजूद नहीं हुई जांच, अब दियारा क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति से बढ़ी चिंता; प्रकाश ओझा बोले- कटाव बढ़ा तो जिला प्रशासन होगा जिम्मेदार

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
जिले में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने के बीच बाढ़ पूर्व कराए गए कटाव निरोधक कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सिमरी प्रखंड क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश ओझा ने बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में कराए गए कटाव निरोधक कार्य एवं जियो बैग में मिट्टी भरने के कार्य में कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए बिहार सरकार के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

 

प्रकाश ओझा का आरोप है कि उन्होंने इस मामले को लेकर पूर्व में कई स्तरों पर शिकायत की, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस जांच नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिले में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे में यदि दियारा क्षेत्रों में बाढ़ के दौरान कटाव बढ़ता है और इससे किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

 

नैनिजोर से केशवपुर हनुमान घाट तक कार्य पर उठाए सवाल

प्रकाश ओझा के अनुसार, बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड के नैनिजोर, धाबी, प्रबोधपुर, बिहार घाट तथा उत्तरी नैनीजोर से केशवपुर हनुमान घाट तक बाढ़ से पहले कटाव रोकने के उद्देश्य से बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से विभिन्न कार्य कराए गए हैं। इनमें कटाव प्रभावित क्षेत्रों में जियो बैग में मिट्टी भरकर लगाए जाने का कार्य भी शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन कार्यों की गुणवत्ता, जियो बैग में निर्धारित मात्रा के अनुरूप मिट्टी भरने, लगाए गए जियो बैग की वास्तविक संख्या और उनकी गुणवत्ता तथा मौके पर कराए गए वास्तविक कार्य को लेकर गंभीर सवाल हैं।

प्राक्कलन और मापन पुस्तिका से भौतिक सत्यापन की मांग

मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में प्रकाश ओझा ने विभागीय प्राक्कलन एवं मापन पुस्तिका में दर्ज कार्यों और धरातल पर कराए गए कार्यों के बीच समानता की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मौके पर जियो बैग की वास्तविक संख्या, उनकी गुणवत्ता और प्रत्येक बैग में भरी गई मिट्टी की मात्रा का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि जियो बैग में निर्धारित मात्रा में मिट्टी नहीं भरी गई है या कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं कराया गया है, तो बाढ़ के समय तटबंध और उसके आसपास बसे गांवों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

जून में डीएम से भी की थी जांच की मांग

प्रकाश ओझा ने बताया कि उन्होंने इससे पहले जून माह में बक्सर जिलाधिकारी को पत्र देकर उक्त कार्यों की जांच कराने की मांग की थी। इसके अलावा कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण विभाग, बक्सर को भी लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच का अनुरोध किया गया था। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक मामले में कोई प्रभावी जांच या कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बाद भी यदि कार्यों की जांच नहीं कराई जाती है, तो इससे कार्य में कथित अनियमितता की आशंका और गहरी होती है।

दियारा क्षेत्रों में बढ़ सकता है कटाव का खतरा

प्रकाश ओझा ने अपने पत्र में प्रमोदपुर, धाबी, उत्तरी नैनीजोर, केशवपुर, राजापुर, गांगुली सहित अन्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान यदि कटाव बढ़ता है तो इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि मामले की जांच के लिए जिला स्तर पर एक स्वतंत्र जांच टीम गठित की जाए और टीम द्वारा कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए।

जांच टीम गठित कर कार्रवाई की मांग

मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में प्रकाश ओझा ने मांग की है कि जांच टीम द्वारा मौके पर कराए गए वास्तविक कार्य, जियो बैग की संख्या एवं गुणवत्ता, प्रत्येक जियो बैग में भरी गई मिट्टी की मात्रा तथा विभागीय प्राक्कलन और मापन पुस्तिका में दर्ज विवरण का मिलान कराया जाए। उन्होंने कहा है कि जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित कार्य एजेंसी तथा जिम्मेदार विभागीय पदाधिकारी या प्राधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने जांच के परिणाम और की गई कार्रवाई की जानकारी उन्हें उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभाग अथवा जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

 

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