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संस्कृत सप्ताह में गूंजे गीता के श्लोक, सस्वर पाठ प्रतियोगिता में मंत्रमुग्ध हुए छात्र-छात्राएं

महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में संस्कृत विभाग ने कराया आयोजन, नैतिक एवं चारित्रिक विकास के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन पर दिया जोर

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय के संस्कृत विभाग के तत्वावधान में ‘संस्कृत सप्ताह’ के उपलक्ष्य में छात्र-छात्राओं के नैतिक एवं चारित्रिक विकास तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन के उद्देश्य से ‘सस्वर श्रीमद्भगवद्गीता पाठ प्रतियोगिता’ का गरिमामयी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का शुद्ध, लयबद्ध एवं भावपूर्ण पाठ प्रस्तुत किया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश आर्य एवं अन्य वरिष्ठ प्राध्यापकों द्वारा माँ सरस्वती तथा महर्षि विश्वामित्र के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। दीप प्रज्वलन के बाद वातावरण आध्यात्मिक एवं ज्ञानमय हो उठा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश आर्य ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला और संपूर्ण मानव दर्शन का उत्कृष्ट मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान तनावपूर्ण परिवेश में युवाओं के लिए गीता के निष्काम कर्मयोग, आत्म-अनुशासन एवं आत्म-प्रबंधन जैसे सिद्धांत अत्यंत उपयोगी हैं। युवाओं को गीता के संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है।

 

विषय प्रवेश कराते हुए संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डॉ. रवि प्रभात ने संस्कृत भाषा एवं श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के सस्वर पाठ की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सस्वर पाठ से वाणी की शुद्धता, एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति का विकास होता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। उन्होंने संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को युवा पीढ़ी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रतियोगिता के दौरान छात्र-छात्राओं ने श्रीमद्भगवद्गीता के द्वादश अध्याय (भक्तियोग) के श्लोकों का सस्वर पाठ किया। प्रतिभागियों ने शुद्ध उच्चारण, उचित लय, स्पष्ट वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ श्लोकों का पाठ कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय परिसर में संस्कृत एवं गीता के श्लोकों की गूंज सुनाई देती रही।

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों का मूल्यांकन निर्णायक मंडल द्वारा शुद्ध उच्चारण, लय, स्पष्टता एवं भाव-प्रस्तुति के विभिन्न मानकों पर किया गया। प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा आगामी शिक्षक दिवस के अवसर पर की जाएगी। कार्यक्रम का मंच संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रवि प्रभात द्वारा किया गया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्राध्यापकों, निर्णायक मंडल एवं छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संस्कृत विभाग के प्राध्यापकगण के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन वैदिक शांति पाठ के साथ हुआ। आयोजन ने न केवल विद्यार्थियों में संस्कृत एवं श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति रुचि बढ़ाने का कार्य किया, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कार एवं नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी सार्थक संदेश दिया।

 

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