गुरु पूर्णिमा पर बक्सर के मंदिरों, मठों और आश्रमों में उमड़ा आस्था का सैलाब, गुरु चरणों में नतमस्तक हुए हजारों श्रद्धालु
बसांव मठ, चरित्रवन, सीताराम विवाह आश्रम समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर वैदिक विधि-विधान से हुआ गुरु पूजन, संतों ने बताया— गुरु ही जीवन को मोक्ष और प्रकाश की ओर ले जाने वाले पथप्रदर्शक


न्यूज़ विज़न। बक्सर
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार को बक्सर जिले के विभिन्न मंदिरों, मठों एवं आश्रमों में सुबह से ही श्रद्धालुओं और शिष्यों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गंगा स्नान के साथ श्रद्धालुओं ने अपने-अपने गुरुओं के आश्रमों में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा गुरु चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। जिले के कई प्रमुख आश्रमों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं, जहां श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार के बाद गुरु दर्शन का सौभाग्य मिला।
गुरु पूर्णिमा को लेकर जिले के धार्मिक स्थलों पर एक दिन पूर्व से ही विशेष तैयारियां की गई थीं। दूर-दराज के जिलों एवं राज्यों से आए अनेक शिष्य बुधवार से पहले ही अपने गुरुधाम पहुंच चुके थे। आश्रमों में ठहरने, भोजन और प्रसाद की समुचित व्यवस्था की गई थी। हिंदू धर्म में गुरु का स्थान भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास के जन्मोत्सव के रूप में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन गुरु की पूजा कर उनके प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया जाता है।
बसांव मठ में गुरु महिमा पर बरसी अमृतवाणी
बसांव मठ के पीठाधीश्वर परम पूज्य श्री श्री 1008 श्री स्वामी अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कलियुग में भगवान विष्णु और सद्गुरु ही जीव को मोक्ष प्रदान करने वाले हैं। गुरु के आशीर्वाद से जीवन प्रकाशमान होता है तथा उनके चरणों की भक्ति ही मानव जीवन का वास्तविक कल्याण करती है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गुरु की अपार महिमा का वर्णन किया गया है। माता-पिता को भी गुरु का दर्जा प्राप्त है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन प्रातःकाल गुरु और माता-पिता के चरणों का दर्शन एवं सम्मान करना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने गुरु के आदर्शों एवं आचरण के अनुरूप जीवन जीने का आह्वान किया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बसांव मठ स्थित राम-जानकी मंदिर में भगवान की आरती एवं विशेष पूजा-अर्चना के बाद मठाधीश्वर की आरती की गई। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने गुरु दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर डॉ. उमा शंकर पांडेय सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
चरित्रवन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ गुरु पूजन
चरित्रवन स्थित पूज्य श्री त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के समाधि स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ गुरु पूजन किया गया। वहीं लक्ष्मीनारायण मंदिर में भी गुरु पूजन एवं विशेष आराधना का आयोजन हुआ। मंदिर के पीठाधीश्वर राजगोपालाचार्य त्यागी जी महाराज ने कहा कि गुरु ही भक्त को भगवान से जोड़ने का कार्य करते हैं। गुरु की कृपा से धन, वैभव, ऐश्वर्य और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। उन्होंने श्री शुकदेव जी महाराज और राजा परीक्षित के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि परमात्मा का निरंतर स्मरण, चिंतन और ध्यान ही मानव जीवन का सबसे सरल एवं श्रेष्ठ मार्ग है। उन्होंने बताया कि दान, तप और ध्यान आत्मा के कल्याण के प्रमुख साधन हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुदेव खांकि बाबा सरकार के समाधि स्थल पर पहुंचकर दर्शन एवं पूजन किया तथा आशीर्वाद प्राप्त किया।
सीताराम विवाह आश्रम में हुआ पंचामृत रुद्राभिषेक
नया बाजार स्थित श्री सीताराम विवाह आश्रम में भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विशेष गुरु पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। आश्रम स्थित श्री राम-जानकी मंदिर में भक्तों ने भजन-कीर्तन कर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद आश्रम के महंत राजा राम शरण दास जी महाराज के नेतृत्व में पूज्य भक्तमाली मामाजी महाराज का वैदिक विधि-विधान से पूजन किया गया। कई क्विंटल पंचामृत से उनका भव्य रुद्राभिषेक भी किया गया। राजा राम शरण दास जी महाराज ने कहा कि ऐसे महान गुरु का सान्निध्य मिलना जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। गुरु के मार्गदर्शन से ही मानव जीवन सफल और सार्थक बनता है। कार्यक्रम के समापन पर सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
भक्ति और श्रद्धा से सराबोर रहा पूरा जिला
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जिले के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर दिनभर भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना, प्रवचन और प्रसाद वितरण का सिलसिला चलता रहा। श्रद्धालुओं ने अपने गुरुजनों का आशीर्वाद लेकर सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की। पूरे जिले में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, आस्था और सनातन परंपरा के उल्लास के साथ मनाया गया।
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