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मां ICU में जिंदगी की जंग लड़ती रहीं, बावजूद बेटी ने दिया इंटरव्यू और रच दिया इतिहास: साल्वी बनीं राजस्व अधिकारी

70वीं बीपीएससी में सफलता हासिल कर रोहतास की बेटी ने बढ़ाया मान, खुशी के बीच मां की कमी ने परिवार को किया भावुक

न्यूज़ विज़न।  बक्सर /बिक्रमगंज 
रोहतास जिले के धनगाई गांव की बेटी साल्वी कुशवाहा ने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर राजस्व अधिकारी बनकर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। साल्वी की इस उपलब्धि से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। हालांकि इस खुशी के बीच उनकी मां सुमिता वर्मा की अनुपस्थिति परिवार को भावुक भी कर रही है।

 

साल्वी कुशवाहा वर्तमान में अपने पिता सुनील कुमार कुशवाहा और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पटना में रहती हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में ग्लोबल एकेडमी, पटना से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद एम.एस. मेमोरियल, पटना से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की तथा मगध महिला कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद बीपीएससी की तैयारी में जुट गईं। अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर राजस्व अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त किया।

 

साल्वी चार भाई-बहनों में दूसरे स्थान पर हैं। उनकी बड़ी बहन सेजल कुशवाहा, छोटी बहन सृष्टि कुशवाहा तथा सबसे छोटे भाई सौम्य पराग हैं। परिवार में सभी ने उनकी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया है। साल्वी की सफलता की कहानी संघर्ष और समर्पण से भरी हुई है। बीपीएससी इंटरव्यू के दौरान उनकी मां गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं और अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थीं। ऐसे कठिन समय में भी साल्वी ने हिम्मत नहीं हारी और पूरे आत्मविश्वास के साथ इंटरव्यू दिया। विपरीत परिस्थितियों में भी उनका मनोबल डगमगाया नहीं और उन्होंने अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा।

साल्वी के पिता सुनील कुमार कुशवाहा ने भावुक होते हुए कहा कि बेटी की सफलता पर उन्हें बेहद गर्व और खुशी है। उन्होंने कहा कि यह पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है, लेकिन इस खुशी को साझा करने के लिए आज उनकी मां इस दुनिया में नहीं हैं। यही बात उन्हें सबसे अधिक दुखी करती है। उन्होंने कहा कि यदि आज उनकी मां जीवित होतीं तो बेटी की इस सफलता को देखकर सबसे अधिक खुश होतीं। साल्वी की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि कठिन से कठिन परिस्थितियां भी उस व्यक्ति का रास्ता नहीं रोक सकतीं, जिसके इरादे मजबूत हों। उनकी उपलब्धि आज हजारों युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

 

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