डीडीसी ने कहा -खेती में कृषि यंत्रों का है महत्वपूर्ण योगदान
संयुक्त कृषि भवन परिसर में दो दिवसीय कृषि यांत्रिकीकरण मेला का हुआ शुभारंभ


न्यूज विजन। बक्सर
संयुक्त कृषि भवन के प्रांगण में रविवार को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए दो दिवसीय कृषि यांत्रिकीकरण मेला का उद्घाटन उप विकास आयुक्त निहारिका छवि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर बक्सर कृषि विभाग के सभी पदाधिकारी, कृषि वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित थे। डीडीसी निहारिका छवि ने किसानों से कहा कि कृषि में यंत्रों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में कृषि यंत्रों पर सरकार की ओर से जो अनुदान मिला रहा है उसका भरपूर लाभ उठाएं। उन्होंने कृषि प्रक्षेत्र में सरकार की ओर से संचालित योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने की बात कही।
मेले के उद्घाटन सत्र में जिला कृषि पदाधिकारी बक्सर, उप निदेशक कृषि अभियंत्रण बक्सर, सभी सहायक निदेशक एवं अनुमंडल कृषि पदाधिकारी उपस्थित थे। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों, कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों ने उपस्थित रहकर किसानों को आधुनिक यंत्रों के तकनीकी फायदों एवं सरकारी सब्सिडी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उद्घाटन के पहले ही दिन किसानों में भारी उत्साह देखा गया। राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 40% से 80% तक के अनुदान पर यंत्र खरीदने हेतु किसानों की भारी भीड़ दिखाई दी। आज प्रमुख यंत्र मेले में किसानों द्वारा खरीदारी की गई। जिसमें प्रमुख रूप से पैड़ी थ्रेसर, कल्टिवेटर, पावर वीडर , चाप कटर, पावर स्प्रेयर, सिंचाई पाइप, फ्लावर मील, मैनुअल एग्री कीट आदि शामिल हैं।
डीएओ धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि जिले में कुल 91 प्रकार के कृषि यंत्रों पर अनुदान देय है। बक्सर जिले में अब तक 4 कस्टम हायरिंग सेंटर और 12 स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। कृषि यंत्र बैंक की स्थापना की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है। उन्होंने कहा कि इस मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे आधुनिक तकनीक से जोड़ना है। उन्होंने सरकार की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उप निदेशक (कृषि अभियंत्रण) ने जोर दिया कि फसल अवशेष प्रबंधन (पराली प्रबंधन) वाले यंत्रों को अपनाकर किसान पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष को खेतों में जलाने से नुकसान ही नुकसान है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। कल मेले के दूसरे और अंतिम दिन भी यंत्रों की प्रदर्शनी एवं बिक्री हेतु लगाएं जाएंगे।





