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35 वर्षों में बक्सर जिले को ना तो अपना गजेटियर मिला और ना ही प्रतीक चिह्न

17 मार्च 1991 को बक्सर अनुमंडल को जिला बनने का गौरव प्राप्त हुआ था

न्यूज विजन। बक्सर

क्योंकि आज ही के दिन यानी 17 मार्च 1991 को बक्सर अनुमंडल को जिला बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। तब से लेकर अब तक जिले का काफी विकास हुआ। सड़क से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली के क्षेत्र में काफी सुधार हुआ। इन विकास कार्यों के बीच जिलेवासियों को आज भी कई कमियां खलती है।

 

 

वरीय अधिवक्ता सह प्रबुद्ध साहित्यकार रामेश्वर प्रसाद वर्मा ने बताया कि आज अपना जिला 35 साल का हो गया। वहीं 17 मार्च 2026 से जिला 36वें साल में प्रवेश कर जाएगा। लेकिन, अभी तक बक्सर जिला का ना तो अपना गजेटियर मिला और ना ही प्रतीक चिन्ह। यही वजह है कि जिला अपने पौराणिक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक स्वरूप बतौर प्रशासनिक व सरकारी दस्तावेज के रूप में अपनी वास्तविक पहचान व्ययक्त करने व दर्शाने में असमर्थ है।

 

 

1926-27, 1956-57 तथा 1964-67 में खुदाई के दौरान जो अवशेष मिले हैं, उनसे बक्सर का संबंध मोहनजोदड़ों और हड़प्पा सभ्यता से मिलता है। शेरशाह सूरी ने 26 जून 1539 को बक्सर जिले स्थित चौसा लड़ाई में हुमायूं को पराजित कर दिल्ली की गद्दी पर कब्जा किया था। वहीं 23 अक्टूबर 1764 को बंगाल के नवाब मीर कासीम, अवध नवाब सिजाउद्दोला और मुगल शासक शाह आलम द्वितीय अंग्रेजी सलतनत के ब्रिश मेजर हेक्टर मुनरो के हाथों बक्सर कतकौली के मैदान में हुए युद्ध हारे थे।
इत तरह से कई धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर आज भी जिले में अवस्थित है, जिसका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों व इतिहास के पन्ने पर दर्ज है। बक्सर को जिले का दर्जा मिले 35 वर्ष हो गया, लेकिन आज तक इसे ना तो अपना गजेटियर मिला और ना ही प्रतीक चिन्ह, जो खेद का विषय है।

 

 

आध्यात्मिक आख्यानों एवं इतिहास में अंकित बक्सर जिला धरोहरों का धनी है। पग-पग पर धरोहरों की भरमार है। बक्सर अपने गर्भ में भारत की धार्मिक, ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरात संजोये हुए है। जिले का संपूर्ण परिवेश अपने पौराणिक एवं ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक अवदानों के लिए पूरे विश्व में चर्चित है। यह जिला महर्षि विश्वामित्र की तपो धरा है। यहां प्रभु श्री राम को अनुज लक्ष्मण के साथ गुरु महर्षि विश्वामित्र ने शिक्षा दी थी। भगवान श्री राम द्वारा स्थापित रामेश्वरनाथ मंदिर गंगा तट स्थित रामेरेखा घाट पर आज भी दर्शनीय है।
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वरीय अधिवक्ता श्री वर्मा ने बताया कि प्रचीन काल में यह भूखंड सिद्धाश्रम, विश्वामित्र आश्रम, वेदगर्भपुरी, व्याध्रसर आदि के नाम से वर्णित है। विष्णु पुराण एवं वामन पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने बक्सर परिसर में ही सिद्धि प्राप्त की थी। अहिल्या मां मंदिर, ब्रह्मेश्वर धाम, गौरी शंकर मंदिर, रामेश्वरनाथ मंदिर समेत समेत अन्य धार्मिक धरोहरों की कोई कमी नहीं है, जिसका उल्लेख धार्मिक ग्रन्थों में है।

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