बूंद-बूंद पानी को तरसे तीन वार्डों के हजारों लोग, चापाकल बना सहारा
मोटर खराब होने के कारण नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 28, 30 और 31 में पेयजल का भीषण संकट


न्यूज विजन। बक्सर
शहर के सिविल लाइंस क्लब स्थित नल-जल योजना की जलमीनार पिछले 11 दिनों से सूखी पड़ी है है। मोटर खराब होने के कारण नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 28, 30 और 31 में पेयजल का भीषण संकट गहरा गया है। इन तीन वार्डों के सैकड़ों घरों में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। स्थिति यह है कि कड़कड़ाती धूप और उमस भरी गर्मी में भी लोग सुबह से शाम तक सिर्फ पानी का इंतजाम करने में जुटे हैं। सबसे अधिक परेशानी उन गरीब परिवारों को उठानी पड़ रही है, जिनके घरों में अपना निजी चापाकल नहीं है। वे पूरी तरह सरकारी सप्लाई के भरोसे थे, जो अब पूरी तरह ठप है।
जलमीनार पर कार्यरत ऑपरेटर रोहित पटेल ने बताया कि मोटर की अंदरूनी पंखी बीते 19 जून से ही खराब है। स्थानीय स्तर पर सुधार न होने के कारण पंखी को खोलकर मरम्मती के लिए पटना भेजा गया है। लेकिन ताज्जुब की बात है कि 11 दिन बीत जाने के बाद भी वहां से रिपेयर होकर पंखी वापस बक्सर नहीं आ सकी है। ऑपरेटर का कहना है कि जैसे ही पटना से पंखी ठीक होने की सूचना आएगी, उसे लाकर तुरंत फिट कर दिया जाएगा और पानी की सप्लाई बहाल हो सकेगी।
11 दिनों से बिना सरकारी पानी के रह रहे स्थानीय मोहल्लेवासियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। लोगों में नगर परिषद के अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने कहा कि एक तरफ सरकार हर घर नल का जल पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बक्सर शहर के बीचों-बीच स्थित तीन वार्डों की आबादी बूंद-बूंद पानी को तरस रही है। इस मामले में न तो नगर परिषद के अधिकारी कोई ठोस कदम उठा रहे हैं और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि इस संकट को दूर करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
पेयजल संकट झेल रहे लोगों की पीड़ा-
दस से ग्यारह दिन हो गए हैं। चापाकल से पानी भरते-भरते हाथ और पीठ में दर्द होने लगा है। घर की जरूरतें पूरी करने के लिए सुबह-शाम मिलाकर 40 से 50 बाल्टी पानी ढोना पड़ रहा है। हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
नंद किशोर चौधरी
गर्मी के इस मौसम में पानी की खपत वैसे ही दोगुनी हो जाती है। हमारे घर में चापाकल नहीं है, इसलिए पड़ोसियों के आगे हाथ फैलाना पड़ता है। जिला प्रशासन को इस गंभीर संकट को देखते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए या मोटर दुरुस्त कराना चाहिए।
मीरा देवी
जब से जलमीनार की मोटर खराब हुई है, तब से घर का पूरा बजट और दिनचर्या बिगड़ गई है। खाना बनाने से लेकर नहाने-धोने तक के काम के लिए पानी का जुगाड़ करना सबसे बड़ी मशक्कत बन गया है।
रानी देवी, स्थानीय निवासी
डिजिटल इंडिया और त्वरित सेवा के दावों के बीच एक मोटर की पंखी ठीक होने में 11 दिन लग जाना सीधे तौर पर नगर परिषद और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
सुनील कुमार
क्या कहती हैं नगर परिषद की सभापति:
नगर परिषद की सभापति कमरून निशा ने कहा कि इस गंभीर समस्या आज मेरे संज्ञान में आया है। बुडको के अधिकारी से बात हुई है और उनसे जल्द से जल्द तकनीकी खराबी को दुरूस्त कराते हुए जलापूर्ति शुरू कराने को कहा गया है।





