धान की फसल पर मंडराया मीली बग का संकट, किसानों की बढ़ी चिंता
इटाढ़ी और राजपुर के खेतों में तेजी से फैल रहा दहिया कीट का प्रकोप, केवीके विशेषज्ञ ने बताए बचाव के उपाय


न्यूज़ विज़न। बक्सर
जिले के खेतों में लहलहा रही धान की फसल पर अब मीली बग यानी दहिया कीट का खतरा मंडराने लगा है। इटाढ़ी और राजपुर प्रखंड के कई क्षेत्रों में धान की फसल में इस कीट का प्रकोप बढ़ने से किसानों की चिंता गहरा गई है। फसल को नुकसान से बचाने के लिए किसान कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचकर विशेषज्ञों से इसके नियंत्रण और प्रबंधन की जानकारी ले रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. रामकेवल ने किसानों को मीली बग की पहचान, इसके कारण होने वाले नुकसान और प्रभावी नियंत्रण के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को समय रहते कीट की पहचान कर आवश्यक कदम उठाने की सलाह दी, ताकि धान की पैदावार को प्रभावित होने से बचाया जा सके।
कोमल तने और पत्तियों का रस चूसकर पौधे को कर देता है कमजोर
डॉ. रामकेवल के अनुसार, मीली बग गुलाबीपन लिए हुए सफेद रंग का कीट होता है। यह धान के कोमल तने और पत्तियों का रस चूसकर पौधे के विकास को प्रभावित करता है। इसके प्रकोप से पौधों का विकास रुक जाता है और उनमें कल्ले निकलना बंद हो जाता है। प्रभावित पौधों में आगे चलकर बालियां भी नहीं निकल पाती हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि ऊंचे और कम पानी वाले खेतों में इस कीट का प्रकोप अपेक्षाकृत अधिक देखा जा रहा है। शुरुआत में यह करीब 2 से 3 वर्ग मीटर के दायरे में छिटपुट रूप से दिखाई दे सकता है। स्थानीय बोलचाल में किसान इसे ‘चतरा लगना’ भी कहते हैं।
सफेद और रूई जैसे पदार्थ से करें कीट की पहचान
किसान फसल का निरीक्षण करते समय तने और पत्तियों के बीच विशेष रूप से ध्यान दें। संक्रमित पौधों में सफेद, चिपचिपा और रूई जैसा पदार्थ जमा हुआ दिखाई दे सकता है। यह मीली बग के प्रकोप का प्रमुख संकेत माना जाता है। डॉ. रामकेवल ने किसानों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते इस कीट का नियंत्रण नहीं किया गया, तो धान के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। इसलिए शुरुआती स्तर पर ही फसल की निगरानी कर आवश्यक प्रबंधन करना जरूरी है।
केवीके विशेषज्ञ ने बताए बचाव के उपाय
मीली बग के प्रकोप से धान की फसल को बचाने के लिए डॉ. रामकेवल ने किसानों को कई महत्वपूर्ण उपाय बताए हैं—
– धान की रोपाई के समय खेत में सही तरीके से लेव लगाकर खेत को पूरी तरह समतल रखें।
– रोपाई के बाद शुरुआती 6 से 8 दिनों तक खेत में 2 से 3 सेंटीमीटर पानी बनाए रखें।
– खेत को लगातार खरपतवार मुक्त रखें, ताकि कीटों को पनपने का अनुकूल वातावरण न मिले।
– खेत में मीली बग का प्रकोप दिखाई देने पर प्रभावित पौधों और आसपास के क्षेत्र पर अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करें।
– विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 4 मिली मात्रा को 10 लीटर पानी में घोलकर प्रभावित क्षेत्र में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
समय पर निगरानी से बच सकती है फसल
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से नियमित रूप से धान की फसल की निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेने की अपील की है। समय रहते मीली बग की पहचान और उचित प्रबंधन से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।





