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युवा संसद में बक्सर के पवन उपाध्याय का परचम, दूसरी बार प्रथम पुरस्कार से बढ़ाया जिले का मान

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित 18वीं युवा संसद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका के लिए मिला प्रथम पुरस्कार; इससे पहले प्रधानमंत्री की भूमिका में भी हासिल कर चुके हैं पहला स्थान

न्यूज़ विज़न।  बक्सर
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित 18वीं युवा संसद में बिहार के बक्सर जिले के बावनबांध ग्राम निवासी पवन उपाध्याय ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर जिले का गौरव बढ़ाया है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पवन ने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका का निर्वहन किया। उनकी इस उपलब्धि से गांव सहित पूरे जिले में खुशी का माहौल है।

 

पवन उपाध्याय वर्तमान में राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में हिंदी विषय के शोधार्थी हैं। युवा संसद में उनकी यह सफलता विशेष इसलिए भी है कि इससे पहले भी वे इस कार्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुके हैं। पिछली बार वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के विद्यार्थी थे और उन्होंने युवा संसद में प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई थी। इस बार नेता प्रतिपक्ष के रूप में प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर उन्होंने संसदीय प्रक्रिया की दोनों प्रमुख भूमिकाओं में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।

 

अपनी उपलब्धि पर पवन उपाध्याय ने कहा कि अवसर ही व्यक्ति को अनुभव प्रदान करते हैं। भारतीय लोकतंत्र में पक्ष और विपक्ष, दोनों की उपस्थिति लोकतंत्र की खूबसूरती है। उन्होंने कहा कि जब हम किसी कार्य को प्रयोगधर्मी दृष्टिकोण के साथ करते हैं, तो उससे अनेक अनुभव स्वतः सृजित होते हैं। संसद के अभिरूप में दो बार अलग-अलग भूमिकाओं का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करना उनके लिए सीखने और संसदीय परंपराओं को समझने का विशेष अवसर रहा है। पवन ने अपने व्यक्तित्व और वैचारिक विकास में छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से प्राप्त अनुशासन और अवसरों के योगदान को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, छात्र जीवन में संगठन के माध्यम से मिले अनुभवों, अनुशासन और विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता ने उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने तथा सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दी। इन अनुभवों ने उनके आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और उत्तरदायित्वबोध को विकसित करने में सहयोग दिया।

अपनी शैक्षणिक यात्रा और उपलब्धियों के संदर्भ में पवन ने अपनी मां के दृढ़ संकल्प को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गांव से केंद्रीय विश्वविद्यालय तक का सफर उनकी मां के संकल्प को साकार करने की यात्रा है। उनके लिए यह उपलब्धि व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ उन मूल्यों, संस्कारों और अनुभवों का परिणाम है, जिन्होंने उनकी जीवन-दृष्टि को आकार दिया। ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक मंच पर अपनी पहचान बनाने वाले पवन उपाध्याय की यह उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उनकी सफलता ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

 

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