हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, हमारी अस्मिता और सामाजिक सरोकार की पहचान : सरोज सिंह
बिहार सेंट्रल स्कूल में हिंदी दिवस पर चेतना शिविर, विद्यार्थियों ने जाना मातृभाषा के सम्मान और संवर्धन का महत्व


न्यूज़ विज़न। बक्सर
शहर के बाईपास रोड स्थित बिहार सेंट्रल स्कूल में 14 सितंबर, हिंदी दिवस के अवसर पर चेतना शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के वर्ग सातवीं से दसवीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के महत्व, उसकी समृद्ध परंपरा और मातृभाषा के प्रति सम्मान की भावना से परिचित कराना था।
चेतना शिविर की अध्यक्षता विद्यालय के सचिव सरोज सिंह ने की। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी भाषा केवल किसी एक दिवस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनमानस के अंतःकरण में बसी हुई भाषा है। हिंदी सिर्फ माध्यम की भाषा नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता और सामाजिक सरोकार की भाषा है। उन्होंने कहा कि हिंदी की प्रासंगिकता केवल भाषाई दृष्टिकोण तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे संपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक रचना क्रम में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
सरोज सिंह ने महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्ति “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल” का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें सभी भाषाओं का सम्मान करना चाहिए, लेकिन अपनी निजी भाषा की उन्नति में ही सभी प्रकार की उन्नति का मूल निहित है। उन्होंने विद्यार्थियों से विशेष आग्रह किया कि वे अपनी मातृभाषा को उसी प्रकार सम्मान और आदर दें, जिस प्रकार अपनी मां का करते हैं। कार्यक्रम में शिक्षक सुनील सिंह ने कहा कि हिंदी एक ऐसा सेतु है, जो विभिन्न विचारों, परंपराओं और संस्कृतियों को आपस में जोड़ने का कार्य करती है। शिक्षक वरुण कुमार ने कहा कि हिंदी भाषा के उत्थान के लिए समाज को उन तमाम पूर्वाग्रहों को छोड़ना होगा, जो इसके विकास के मार्ग में बाधक हैं।
वहीं शिक्षक संतोष कुमार ने कहा कि हिंदी भाषा के प्रति हमारा आग्रह और लगाव वैसा ही होना चाहिए, जैसा एक शिशु का अपनी मां के प्रति होता है। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के उप प्राचार्य विनय तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। चेतना शिविर ने विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, गौरव और अपनी मातृभाषा को समृद्ध बनाने की जिम्मेदारी का भाव जागृत किया।





