बक्सर में खरीफ सब्जी उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा, 50 किसानों को उन्नत बीज वितरित कर दी गई आधुनिक खेती की ट्रेनिंग
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी व कृषि विज्ञान केंद्र बक्सर की संयुक्त पहल, अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत किसानों को उन्नत तकनीक, कीट नियंत्रण और पोषक तत्व प्रबंधन की दी गई जानकारी


न्यूज विज़न। बक्सर
खरीफ मौसम में सब्जी फसलों के उन्नत उत्पादन, किसानों की आय में वृद्धि तथा टिकाऊ आजीविका एवं पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को बक्सर जिले के दलसागर पंचायत स्थित गांव में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर), वाराणसी एवं कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में सीमांत एवं लघु किसानों को आधुनिक सब्जी उत्पादन तकनीकों से अवगत कराया गया। साथ ही लगभग 8 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रदर्शन प्लॉट लगाने के लिए 50 किसानों के बीच उन्नत किस्मों के बीजों का वितरण किया गया।
वितरित किए गए बीजों में भिंडी (काशी चमन), लोबिया (काशी निधि), कोंहड़ा (काशी हरित), लौकी (काशी गंगा) तथा किचन गार्डन पैकेट शामिल थे। इन उन्नत किस्मों के माध्यम से किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता तथा आर्थिक लाभ प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष राय ने अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत संस्थान द्वारा किसानों की आय बढ़ाने एवं आजीविका सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने उन्नत सब्जी किस्मों की विशेषताओं, वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों तथा सब्जी उत्पादन के माध्यम से पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वहीं वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार ने किसानों को सब्जी फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों की पहचान, रोकथाम एवं समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुरूप कीट नियंत्रण अपनाने की अपील की, ताकि उत्पादन लागत कम होने के साथ फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हो सके।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र, लालगंज (बक्सर) के प्रमुख डॉ. देवकरन ने सब्जी फसलों में पोषक तत्व प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य के अनुरूप संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर विशेष बल देते हुए किसानों को नियमित मृदा परीक्षण कराने की सलाह दी। उनका कहना था कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने से उत्पादन बढ़ता है और खेती अधिक लाभकारी बनती है।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच नंद बिहारी पासवान सहित 60 से अधिक महिला एवं पुरुष किसान उपस्थित रहे। किसानों ने वैज्ञानिकों से खेती से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने व्यावहारिक समाधान भी बताया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से किसानों में आधुनिक एवं वैज्ञानिक सब्जी खेती के प्रति उत्साह देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्नत बीजों और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से जिले में खरीफ सब्जी उत्पादन बढ़ेगा, किसानों की आय में वृद्धि होगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण सुरक्षा और टिकाऊ आजीविका को नई मजबूती मिलेगी।





