CRIME

बक्सर सेंट्रल जेल में 13 दिन पहले गए बंदी की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया मारपीट का आरोप

सदर अस्पताल में दो घंटे हंगामा, ज्योति चौक पर शव रखकर प्रदर्शन; जेल प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

न्यूज़ विज़न।  बक्सर 
बिहार के बक्सर स्थित सेंट्रल जेल में एक बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने से प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे की बताई जा रही है। मृतक की पहचान जेल नगर पइन रोड निवासी केदार सिंह के 32 वर्षीय पुत्र राजेंद्र प्रसाद के रूप में हुई है, जिन्हें 12 फरवरी को शराब बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर 13 फरवरी को जेल भेजा गया था।

 

अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत या कुछ और?
जेल प्रशासन के अनुसार, राजेंद्र प्रसाद की तबीयत खराब होने पर उन्हें जेल के अस्पताल वार्ड में रखा गया था। शुक्रवार सुबह अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। इसके बाद जेल कर्मियों ने शव को सदर अस्पताल बक्सर पहुंचाया तथा पुलिस के माध्यम से परिजनों को सूचना दी गई। हालांकि, परिजनों का आरोप है कि मौत स्वाभाविक नहीं बल्कि मारपीट का नतीजा है। उनका कहना है कि दो दिन पहले ही वे जेल में मिलकर आए थे, तब वह बिल्कुल ठीक थे। ऐसे में अचानक मौत होना कई सवाल खड़े करता है।

 

“शरीर पर थे चोट के निशान” – परिजन
मृतक के भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि राजेंद्र प्रसाद के शरीर पर चोट के निशान थे, जिससे स्पष्ट होता है कि उनके साथ मारपीट की गई थी। उन्होंने इसे जेल प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से की गई हत्या बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। मृतक की बहन रीना कुमारी ने भी आरोप लगाया कि उनके भाई को रात में घर से गिरफ्तार कर ले जाया गया और जेल में प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि यह सुनियोजित हत्या है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। सदर अस्पताल में हंगामा, अधिकारियों ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही परिजन और स्थानीय लोग सदर अस्पताल पहुंचे और करीब दो घंटे तक जमकर हंगामा किया। हालात को देखते हुए सदर एसडीपीओ गौरव पांडेय, नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों के समझाने-बुझाने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। एसडीपीओ ने कहा कि यदि परिजनों द्वारा एफआईआर दर्ज कराई जाती है तो मामले की जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ज्योति चौक पर शव रखकर प्रदर्शन
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने रिपोर्ट में लिपापोती का आरोप लगाते हुए शव को ज्योति चौक पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। जेल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और दोषी कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

उठते सवाल
क्या बंदी की मौत स्वाभाविक थी या किसी मारपीट का परिणाम?
यदि तबीयत खराब थी तो बेहतर इलाज की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
शव को अस्पताल में लावारिस हालत में छोड़ने की बात में कितनी सच्चाई है?
क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सभी तथ्यों को पारदर्शिता से दर्ज किया गया?

फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कह रहा है। इस घटना ने एक बार फिर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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